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sanjiv verma salil
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कार्यशाला: रचना-प्रति रचना घनाक्षरी फेसबुक * गुरु सक्सेना नरसिंहपुर मध्य प्रदेश * चमक-दमक साज-सज्जा मुख-मंडल पै तड़क-भड़क भी विशेष होना चाहिए। आत्म प्रचार की क्रिकेट का हो बल्लेबाज लिस्ट कार्यक्रमों वाली पेश होना चाहिए।। मछली फँसानेवाले काँटे जैसी शब्दावली हीरो...
sanjiv verma salil
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रचना-प्रतिरचनाराकेश खण्डेलवाल-संजीव*अचल रहे संकल्प, विकल्पों पर विचार का समय नहीं हैहुई व्यवस्था ही प्रधान, जो करे व्यवस्था अभय नहीं हैअभय दान जो मांगा करते उन हाथों में शक्ति नहीं हैपाना है अधिकार अगर तो कमर बांध कर लड़ना होगाकौन व्यवस्था का अनुयायी? केवल हम हैं या...
sanjiv verma salil
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रचना - प्रति रचना : इंदिरा प्रताप / संजीव 'सलिल'*रचना:अमलतास का पेड़इंदिरा प्रताप*वर्षों बाद लौटने पर घरआँखें अब भी ढूँढ रही हैंपेड़ पुराना अमलतास का,सड़क किनारे यहीं खड़ा थालदा हुआ पीले फूलों से|पहली सूरज की किरणों सेसजग नीड़ का कोना–कोना,पत्तों के झुरमुट के पीछे,कलरव...
sanjiv verma salil
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रचना-प्रति रचनाराकेश खण्डेलवाल-संजीव सलिलदिन सप्ताह महीने बीतेघिरे हुए प्रश्नों में जीतेअपने बिम्बों में अब खुद मैंप्रश्न चिन्ह जैसा दिखता हूँअब मैं गीत नहीं लिखता हूँभावों की छलके गागरिया, पर न भरे शब्दों की आँजुरहोता नहीं अधर छूने को सरगम का कोई सुर आतुरछन्दों की...
sanjiv verma salil
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व्यंग्य रचना:अभिनंदन लो*युग-कवयित्री! अभिनंदन लो....*सब जग अपना, कुछ न परायाशुभ सिद्धांत तुम्हें यह भाया.गैर नहीं कुछ भी है जग में-'विश्व एक' अपना सरमाया.जहाँ मिले झट झपट वहीं सेअपने माथे यश-चंदन लोयुग-कवयित्री अभिनंदन लो....*मेरा-तेरा मिथ्...
विजय राजबली माथुर
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  मंजुल भारद्वाज की कविताओं ने मोड़ा राजनैतिक बहस का रुख !आपदा मनुष्य को एक नयी पहचान देती है। आज की विकट स्थिति ने समाज, मानव प्रकृति और व्यवस्था के असली चेहरे को उजागर किया है, ऐसी स्थिति आमतौर पर हमारे सामने नहीं आती और यह दुनिया के इतिहास में पहली बार...
ऋता शेखर 'मधु'
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मन पाखी पिंजर छोड़ चलामन पाखी पिंजर छोड़ चला।तन से भी रिश्ता तोड़ चला ।।जीवन की पटरी टूट गयी ।माया की गठरी छूट गयी ।अब रहा न कोई साथी है,मंजिल पर मटकी फूट गयी।।निष्ठुरता से मुँह मोड़ चला ।मन पाखी पिंजर छोड़ चला ।।जीवन घट डूबा उतराया ।माँझी कोई पार न पाया ।शक्ति थी पँखों...
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ऋता शेखर 'मधु'
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क्या तेरा है क्या मेरा हैदुनिया तो रैन बसेरा हैक्या तेरा है क्या मेरा है|यह घर कुछ दिन का डेरा है|साथ चलेंगे कर्म हमारे,यह पाप-पुण्य का फेरा है||मानवता का साथी बनकर,मिल जाता नया सवेरा है |दुनिया तो रैन बसेरा है ||१दुनिया में हर दीन-दुखी को,गले लगाकर के चलना है|बिन...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत सभी रचनाएँ
sanjiv verma salil
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हास्य रचना:मेरी श्वास-श्वास में कविता*मेरी श्वास-श्वास में कविताछींक-खाँस दूँ तो हो गीत।युग क्या जाने खर्राटों मेंमेरे व्याप्त मधुर संगीत।पल-पल में कविता कर देतापहर-पहर में लिखूँ निबंध।मुक्तक-क्षणिका क्षण-क्षण होतेचुटकी बजती काव्य प्रबंध।रस-लय-छंद-अलंकारों सेलेना-द...
 पोस्ट लेवल : हास्य रचना
ऋता शेखर 'मधु'
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 छंद- शक्ति /वाचिक भुजंगी 122 122 122 12****************************जिसे चाहिये जो दिया है सदामिला है हमें जो लिया है सदान रखते शिकायत न शिकवा कभीसुधा संग विष भी पिया है सदालुभाते नहीं रूप दौलत कभीहृदय से गुणों को जिया है सदासमेकित हुआ नाद ओंकार मेंभ्रमर योग ह...