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sanjiv verma salil
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राखी गीत*बंधनों से मुक्त हो जा*बंधनों से मुक्त हो जाकह रही राखी मुखर होकभी अबला रही बहिनाबने सबला अब प्रखर होतोड़ देना वह कलाईजो अचाहे राह रोकेकाट लेना जुबां जोफिकरे कसे या तुझे टोंकेसासरे जा, मायके सेटूट मत, संयुक्त हो जाकह रही राखी मुखर होबंधनों से मुक्त हो जाबलि...
 पोस्ट लेवल : राखी गीत
sanjiv verma salil
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अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंकसंकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतरबंधनों से मुक्त हो जा बंधनों से मुक्त हो जाकह रही राखी...
 पोस्ट लेवल : संजीव राखी गीत sanjiv rakhi geet