ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
27
अरुंधति रॉय इन हिंदी — स्वतंत्र किन्तु जाति व्यवस्था में आकंठ डूबा भारत राष्ट्र — एक था डॉक्टर एक था संतकि क्याक्या गाँधी नही थे और क्याक्या आंबेडकर थेअरुंधति राय की किताब उनकी भाषा सब उनके निर्भीक तेवर के होते हैं। कुछ समय पहले अंग्रेजी में प्रकाशित उनकी किताब 'द...
अनंत विजय
56
पिछले दिनों एक छोटे से साहित्यिक जमावड़े में बात ‘नई वाली हिंदी’ से शुरू हुई, जिसमें उन कृतियों पर लंबी बात हुई, फिर अन्य प्रकाशनों से प्रकाशित होनेवाले छोटे-छोटे उपन्यासों पर चर्चा चल निकली। वहां से होते होते साहित्य के तथाकथित मुख्यधारा के लेखन पर बात होने लगी। स...
Bharat Tiwari
27
Photo (c) Krishna Sobtiकृष्णा सोबतीजी की "मार्फ़त दिल्ली" पढ़ रहा हूँ. मैं, साहित्य आदतन तोड़ा धीरे-धीरे ही पढ़ता हूँ. और तब तो ठहर-ही जाता हूँ जब कुछ पढ़े जा रहे से कोई विचलन पैदा हो जाती है. कल रात 'पितृ हत्या' पढ़ते हुए ऐसा ही हुआ. रुक गया  अब कृष्णाजी से बात हो...
विवेक अग्रवाल
272
“बॉंबे बार – चिटके तो फटके” का विमोचन 13 जनवरी 2018 को विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली में संसदीय राजभाषा समिती के उपाध्यक्ष व राज्यसभा सांसद, उज्जैन श्री सत्यनारायण जटिया ने किया। इस मौके पर कई वरिष्ठ पत्रकारों व लेखकों ने भी शिरकत की। मुंबई की बारबालाओं के स्याह और सफे...
विवेक अग्रवाल
110
“बॉंबे बार – चिटके तो फटके” का विमोचन 13 जनवरी 2018 को विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली में संसदीय राजभाषा समिती के उपाध्यक्ष व राज्यसभा सांसद, उज्जैन श्री सत्यनारायण जटिया ने किया। इस मौके पर कई वरिष्ठ पत्रकारों व लेखकों ने भी शिरकत की। मुंबई की बारबालाओं के स्याह और सफे...
Bharat Tiwari
27
Photographs and Report68th Rajkamal Prakashan Foundation Day28 फरवरी को कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में राजकमल प्रकाशन ने अपना 68वां स्थापना दिवस मनाया. कार्यक्रम में इतिहासकार सुधीर चंद्र द्वारा  'गाँधी: राजनीति और नैतिकता' पर व्याख्यान हुआ'। 1947 में स...
prabhat ranjan
31
अकबर भारतीय इतिहास के सबसे बड़े नायकों में एक हैं. उनके ऊपर पहला उपन्यास आ रहा है- 'अकबर'. लिखा है शाज़ी ज़माँ ने. प्रकाशक है राजकमल प्रकाशन. आज जानकी पुल के पाठकों के लिए उसका एक अंश- मॉडरेटरयह उपन्यास  लेखक ने कल्पना के बूते पर नहीं, बाज़ार से दरबार तक के&...
prabhat ranjan
31
राजकमल चौधरी ने लेखन में बनी-बनाई हर लीक को तोड़ने की कोशिश की, हर मानक को ध्वस्त किया. कल जब राजकमल चौधरी रचनावली का लोकार्पण हो रहा था और मंच से मैनेजर पाण्डेय उनकी महानता को लेकर वक्तव्य दे रहे थे, जिसके बारे में मैंने गीताश्री जी की फेसबुक वाल पर पढ़ा तो लगा कि र...
prabhat ranjan
31
कल की दोपहर बड़ी ख़ास थी. वसंत की दोपहरें आम तौर पर उदास करने वाली होती हैं. धूप की गर्मी, हवाओं की चोट, गिरते पत्तों का शोर. लेकिन इण्डिया इंटरनेशनल सेंटर की वह दोपहर ख़ास थी. 28 फरवरी का दिन हिंदी के सबसे बड़े प्रकाशन समूह राजकमल प्रकाशन समूह का स्थापना दिवस होता है....
अविनाश वाचस्पति
11