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राजीव तनेजा
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"स्वादानुसार"बुरकना चाहता हूँ मैं तुम्हारे...अद्ध पनपे...अद्ध विकसित..मगर पनपने को आतुर..खिलखिलाते सपनों पर...अपनी पसंद का...नमक और मिर्च..ताकि तुम बन सको...मेरे अनुकूल..मेरे...सिर्फ मेरे...स्वादानुसार
 पोस्ट लेवल : राजीव तनेजा कविता
राजीव तनेजा
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“हद हो गयी यार ये तो बेईमानी की…मुझ…मुझ पर विश्वास नहीं है पट्ठों को….सब स्साले बेईमान….मुझको…मुझको भी अपने जैसा समझ रखा है…एक एक..एक एक पाई का हिसाब लिखा हुआ है मेरे पास…जब चाहो…जहाँ चाहो...लैजर…खाते सब चैक करवा लो…. “क्या हुआ तनेजा जी?…किस पर राशन पानी ले...
राजीव तनेजा
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“हद हो गयी ये तो एकदम पागलपन की…नासमझ है स्साले सब के सब….अक्ल नहीं है किसी एक में भी…लाठी..फन फैलाए..नाग पर भांजनी है मगर पट्ठे..ऐसे कमअक्ल कि निरीह बेचारी जनता के ही एक तबके को पीटने की फिराक में हाय तौबा मचा…अधमरे हुए जा रहे हैं"… “किसकी बात कर रहे हैं तने...
राजीव तनेजा
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ट्रिंग ट्रिंग.. “हैलो….कौन बोल रहा है?”.. “डॉक्टर साहब घर पर हैं?”… “हाँ!…जी बोल रहा हूँ…आप कौन?”.. “जी!..मैं शर्मा… “शरमाइए  मत…सीधे सीधे फरमाइए कि…आप हैं कौन?”… “ज्ज…जी!…म्म..मैं… “अब यूँ ही मिमियाते रहेंगे या अपना नाम..पता ठिकाना कुछ बताएँग...
राजीव तनेजा
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  "हत्या" पढना चाहता हूँ मैं... बड़े प्रेम और लगन से... मंत्रमुग्ध हो.. पन्ना दर पन्ना... तुम्हारे उजले...निष्कलंक..अतीत और... स्वाभीमानी वर्तमान का ताकि भविष्य में तुम्हारे... कभी मैं कर सकूँ... आसानी से...निसंकोच तुम्हारे ही...उजले चरित...
राजीव तनेजा
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  “पागल हो गए हैं स्साले सब के सब….दिमाग घास चरने चला गया है पट्ठों का…इन्हें तो वोट दे के ही गलती कर ली मैंने…अच्छा भला झाडू वाला भाडू तरले कर रहा था दुनिया भर के लेकिन नहीं..मुझे तो अच्छे दिनों के कीड़े ने काट खाया था ना?..लो!..आ गए अच्छे दिन..अब ले लो वडेवे...
राजीव तनेजा
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“ओह!…शिट..पहुँच जाना चाहिए था अब तक तो उसे….पता भी है कि मुझे फिल्म की स्टार्टिंग मिस करना बिलकुल भी पसंद नहीं”… “कहीं ट्रैफिक की वजह से तो नहीं…इस वक्त ट्रैफिक भी तो सड़कों पे बहुत होता है लेकिन अगर ऐसी ही बात थी तो घर से जल्दी निकलना चाहिए था उसे"सड़क पे भारी...
राजीव तनेजा
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तेरे आँसूओं की कीमत कम नहीं..…………........बहुत है मेरे लिए डॉक्टर ने जो कहा है..सेलाइन वाटर बैस्ट नेज़ल ड्राप है मेरे लिए -------------------------------------------------------------------------- प्रभु...क्यों ना उतारूं सुबह शाम मैं..आरती जामुन सारे तोड़ ले जा...
राजीव तनेजा
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***राजीव तनेजा*** फेसबुकिया नशा ऐसा नशा है कि एक बार इसकी लत लग गई तो समझो लग गयी...बंदा बावलों की तरह बार बार टपक पड़ता है इसकी साईट पर कि..."जा के देखूँ तो सही मुझे कितने लाईक और कितने कमेन्ट मिले हैं?"... "अरे!...तुझे क्या लड्डू लेने हैं इ...
राजीव तनेजा
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