ब्लॉगसेतु

राजीव तनेजा
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कुछ लोग महान पैदा होते हैं.........कुछ पर महानता थोप दी जाती है कुछ चाकुओं से खेलते हैं और…कुछ को जबरन सौंप..तोप दी जाती है **********************************************************अजीब रिश्ता है मेरा तुमसे और......…...........तन्हाई से दिन में झिझक...
राजीव तनेजा
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इस बात में रत्ती भर भी संदेह नहीं कि आजकल चल रही सोशल नेटवर्किंग साईट्स जैसे याहू..ट्विटर और फेसबुक वगैरा में से फेसबुक सबसे ऊपर है... यहाँ पर हर व्यक्ति अपने किसी ना किसी तयशुदा मकसद से आया है...बहुत से लोग यहाँ पर सिर्फ मस्ती मारने के उद्देश्य से मंडरा...
राजीव तनेजा
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अजब ये फेसबुक और अजब इसके रिश्ते कभी कच्ची धूप से खिलते कभी घुप्प अँधेरे में सिमटते  तुरत फुरत इस पल बनते झटपट उस  पल बिगड़ते अजब ये फेसबुक और अजब इसके रिश्ते बेगानों संग प्रीत जताते अनजानों संग पेंच लड़ाते कभी हँसते तो कभी रोते सपने पर नित नए संजोते अ...
राजीव तनेजा
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मेरी कहानी छोड़ो ना...कौन पूछता है का ऑडियो वर्ज़न अर्चना चावजी की आवाज़ में     
राजीव तनेजा
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“ओहो!…शर्मा जी…आप….धन भाग हमारे जो दर्शन हुए तुम्हारे”… “जी!…तनेजा जी….धन भाग तो मेरे जो आपसे मुलाक़ात हो गयी"… “हें…हें…हें…शर्मा जी….काहे को शर्मिन्दा कर रहे हैं?….मैं भला किस खेत की मूली हूँ?….कहिये!…कैसे याद किया?”… “अब…यार…क्या बताऊँ?…मेरी तो कुछ भी...
राजीव तनेजा
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“हैली!…इज इट…..9810821361? “येस्स!…स्पीकिंग"… “आप फलाना एण्ड ढीमका प्लेसमेंट एजेन्सी से बोल रहे हैं?”… “जी!…बिलकुल बोल रहे हैं"… “थैंक गाड…बड़ी ही मुश्किल से आपका नंबर लगा है…सुबह से ट्राई कर रहा हूँ"… “जी!…आजकल बड़ा सीज़न चल रहा है ना…इसलिए&quot...
राजीव तनेजा
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शरद को हरविंदर मिला करके लम्बे हाथ करके लम्बे हाथ   थप्पड़ जोर से मारा थप्पड़ जोर से मारा काबू रहा ना गुस्से पे चढ गया ऊपर पारा…. चढ गया ऊपर पारा सूज गयी सारी आँख सूज गया बूत्था सारा सारे मिल के बोलो  तारा रारा…तारा रारा ***राजीव...
राजीव तनेजा
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"उफ़्फ़!…ये कमर का दर्द तो मेरी जान ले के रहेगा"मेरा कराहते हुए डाक्टर के क्लीनिक में प्रवेश... "डाक्टर साहब...नमस्कार"....    "कहिए!...तनेजा जी...कैसे हैं आप?"...."अब...यकीनन...बढ़िया तो हूँ नहीं...तभी तो आपके पास आया हूँ"...."जी!...ये तो मैं क्लीनिक...
राजीव तनेजा
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विचार इटली के...कहानी भारत की और ज़ुबान यू.पी की "हद हो गई यार ये तो बदइंतजामी से भरी भारी भरकम  लापरवाही की...मैं क्या आप सबकी जर  खरीदी हुई गुलाम हूँ?  या फिर छुट्टी से लौट आई कोई नाबालिग बँधुआ मजदूर हूँ?... ... क्या...
राजीव तनेजा
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"ओहो!...शर्मा जी आप... लीजिये... लीजिये... मोतीचूर के लड्डू लीजिये".... "क्यों भय्यी?....किस खुशी में लड्डू बांटे जा रहे हैं?"... "खुशी तो ऐसी है शर्मा जी की आप भी सुनेंगे तो खुशी के मारे उछल पड़ेंगे"... "ओह!...तो इसका मतलब य...