ब्लॉगसेतु

राजीव तनेजा
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हद हो गई यार ये तो नासमझी की...पगला गए हैं सब के सब...दिमाग सैंटर में नहीं है किसी का... . बताओ!...जिसने अपनी पूरी ज़िंदगी गुज़ार दी दूसरों को टोपी पहनाने में...उसे टोपी पहनने की नसीहत दे रहे हैं?.... टोपी!...वो भी किसकी?....अण्णा की... क्यों भय्यी?....और कोई भ...
राजीव तनेजा
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हे!...ऊपरवाले...हे!...परवरदिगार....हे!... कुल देवता...  बहुतों पर उपकार किए हैं तूने...बहुतों को सर चढ़ाया है... कुछ हमारी भी खबर ले... हे!... बहुतों के देवता.....हे!...सैंकड़ों के माई-बाप... सबकी रक्षा तू सदा करता चला आया है... कुछ हमारी भी सोच... तेरे सिवा...
राजीव तनेजा
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ट्रिंग…ट्रिंग….ट्रिंग…ट्रिंग… “ह्ह….हैलो…श्श….शर्मा जी?”… “हाँ!…जी….बोल रहा हूँ…आप कौन?”… “मैं…संजू”….. “संजू?”….. “जी!….संजू…..पहचाना नहीं?…..राजीव तनेजा की वाईफ"…. “ज्ज…जी भाभी जी….कहिये…क्या हुक्म है मेरे लिए?…..सब खैरियत तो है ना?”… “अरे!…खैरियत...
राजीव तनेजा
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दोस्तों…जैसा कि इस कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे ‘दुबे’ नाम का एक अनजाना शख्स मुझे चने के झाड पे चढाते हुए मेरी कहानी पर फिल्म बनाने का ऑफर देता है और कई दिलचस्प मोड़ों के बाद  बदलते घटनाक्रम के दौरान वो मेरी किताब भी छपवाने का वा...
राजीव तनेजा
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नोट: दोस्तों….हाल ही में हिन्दी ब्लॉगजगत में घटित एक सच्ची घटना एवं कल्पना का ये समिश्रण आपको कैसा लगा?…ज़रूर बताएँ “हैलो….तनेजा जी?”… “हाँ!…जी बोल रहा हूँ…आप कौन?”… “मैं दुबे…जौनपुर से"… “जी!…दुबे जी…कहिये…क्या खिदमत कर सकता हूँ मैं आप...
राजीव तनेजा
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क्या?…क्या है महान आखिर आपके इस देश में?…किस गुरुर में?…किस घमण्ड में इतराए चले जा रहे हैं आप लोग?…ले-दे के एक ताजमहल या फिर कुछ पुराने टूटे-टाटे…बाबा आदम के ज़माने के खंडहरों समेत ‘हँसते रहो' का  राजीव तनेजा ही तो बचा है आपके इस अजब-गज़ब देश में देखने लायक ची...
राजीव तनेजा
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“माना कि मैं खुर्राट हूँ…आला दर्जे का खुर्राट…..अव्वल दर्जे का खुर्राट…तो इसमें आखिर…गलत क्या है?….क्या अपने फायदे के लिए चालाक होना…गलत होना….सही नहीं है…..गलत है?…और अगर है…तो भी मुझे किसी की चिंता नहीं…किसी की परवाह नहीं…..मुझे गर्व है कि मैं अव्वल दर्जे का कमीन...
राजीव तनेजा
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“हद हो गई बेशर्मी की ये तो …कोई भरोसा नहीं इन कंबख्तमारी औरतों का….किसी की सगी नहीं होती हैं ये"… “आखिर!…हुआ क्या तनेजा जी?….क्यों इस कदर बडबड़ाए चले जा रहे हैं?”… “बडबड़ाऊँ नहीं तो और क्या करूँ गुप्ता जी?….और छोड़ा ही किस लायक है उस  कंबख्तमारी ने मुझे?...
राजीव तनेजा
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“हाँ!…तो पप्पू जी…मेरे ख्याल से काफी आराम हो गया है….अब आगे की कहानी शुरू करें?”… “जी!…ज़रूर"… “तो फिर बताइये…क्या टैंशन है”… नोट: दोस्तों मेरी पिछली कहानी ‘भोगी को क्या भोगना…भोगी मांगे दाम' ज़रूरत से ज्यादा बड़ी हो रही थी…इसलिए मैंने उस कहा...
राजीव तनेजा
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समझ में नहीं आ रहा मुझे कि आखिर!…हो क्या गया है हमारे देश को…इसकी भोली-भाली जनता को?…. कभी जनता के जनार्दन को सरेआम जूता दिखा दिया जाता है तो कभी जूता दिखाने वाले को दिग्गी द्वारा भरी भीड़ में बेदर्दी से लतिया दिया जाता है…पीट दिया जाता है…आखिर!..ये होता क्या जा र...