ब्लॉगसेतु

राजीव तनेजा
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हाँ!..तो मेहरबान…कद्रदान…थूकदान…पीकदान…जैसा कि आप जानते ही हैं कि आगामी 20 मार्च याने के ठीक होली के दिन प्रथम अंतराष्ट्रीय हिन्दी ब्लोगर सम्मलेन का बांग्लादेश में होना निश्चित हुआ है…तो उसी को मद्देनज़र रखते हुए देश-विदेश के नामी ब्लोगरों ने इसमें भाग लेने के लिए प...
राजीव तनेजा
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पति:डार्लिंग…फटाफट तैयार हो जाओ…फिल्म की टिकट लाया हूँ… पत्नी(खुश होकर):अरे!…वाह…कौन सी फिल्म है? पति:सात खून माफ पत्नी(मुँह बनाते हुए):दिमाग घास चरने चला गया है क्या तुम्हारा?…..मुझे नहीं देखनी ये बकवास फिल्म पति:अरे!…तुम्हें नहीं पता…बहुत बढ़िया फिल्म है...
राजीव तनेजा
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ये क्या?…गाँव अभी बसा नहीं कि….जगह-जगह से फोन आने भी शुरू हो गए… “अरे!…अरे…क्या करते हो?…पहले सम्मलेन को तो ठीकठाक से हो जाने दो…उसके बाद करते रहना आराम से नुक्ते की चिंदी-चिंदी लेकिन नहीं…बिना टोके चैन कहाँ पड़ता है हम हिंदुस्तानियों को?”… “भईय्या!…ये कमी रह गई तो...
राजीव तनेजा
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     Get this widget |     Track details  |         eSnips Social DNA    खुशखबरी…खुशखबरी…खुशखबरी….हिन्दी के हित में जुड़े हर खास औ आम और सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि आग...
राजीव तनेजा
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  "उफ!...क्या किस्मत है मेरी?….स्साला...जो कोई भी आता है...बिना जाँचे-परखे ही सीधा...ठोकता है...बजाता है और अपने रस्ते  चल देता है"... "क्या हुआ तनेजा जी?"... "अब क्या बताऊँ जायसवाल जी....जब दिन बुरे चल रहे हों तो ऊँट पे बैठने...
राजीव तनेजा
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    “सजन रे…बूट मत खोलो…अभी बाज़ार जाना है… ना दालें हैं ..ना सब्जी है…अभी तो राशन लाना है"… अरे!…ये क्या?….मैं तो असली गीत गाने के बजाय उसकी पैरोडी गाने लगा?…गा-गा मस्ताने लगा….असली गाना तो शायद…कुछ इस तरह से था ना?… “सजन रे…झूठ मत बोलो…खुद...
राजीव तनेजा
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    "ओफ्फो!…कुछ याद भी रहता है इसे?....आज…इस वैलैंटाईन के दिन को तो बक्श देना था कम से कम लेकिन नहीं...’बरसों से पाल-पोस कर परिपक्व की हुई बुरी आदत को भला एक दिन के लिए भी क्यों त्यागा जाए?’....यही सोचा होगा ना शायद उसने?"... &quot...
राजीव तनेजा
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“ओ!…तुस्सी ते छा गए गुरु…साड्डे दिल नूँ भा गए गुरु…पुच्च…पुच्च…पुच्च"शर्मा जी ने लपक कर एक साथ तीन लार भरे चुम्बन मेरे बाएँ गाल पे जड़ दिए… “हटिये!…हटिये…दूर हटिये..कोई देख लेगा”मैं हडबडा कर बौखलाते हुए  पीछे हट कर बोला…. “ओए!…देख लेगा तो फिर देखता रहे…म...
राजीव तनेजा
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“अब क्या करूँ शर्मा जी…इस स्साले चपड़गंजू का?…ना मौक़ा देखता है और ना ही उसकी नज़ाकत….बिना माहौल देखे ही पट्ठा…बात-बात में …बिना बात के तिया-पांचा करने को बेताब हो…नाक में दम करता हुआ सीधा बाप पर पहुँच जाता है"… “तो लट्ठ मार के मुंह तोड़ दो ना ससुरे का…अपने आप ठी...
राजीव तनेजा
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कार्टून सौजन्य- इरफ़ान “हद हो गई यार ये तो….हम अभी अंधे हुए नहीं और इन स्सालों के हाथ बटेर भी लग गई…इस सुसरे लोकराज में जो हो जाए…थोड़ा है”मैं गुस्से से अपने  पैर पटकता हुआ बोला… “क्या हुआ तनेजा जी?…इस कदर बौखलाए-बौखलाए से क्यों घूम रहे हैं?”… “कमाल करते ह...