ब्लॉगसेतु

अनंत विजय
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बासु भट्टाचार्य जब हिंदी के मशहूर उपन्यासकार फणीश्वर नाथ रेणु की कृति ‘तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम’ पर आधारित फिल्म ‘तीसरी कसम’ का निर्देशन कर रहे थे तो उनके साथ सहायक निर्देशक के रूप में जुड़े थे बासु चटर्जी। जब बासु चटर्जी ने फिल्म बनाने का फैसला लिया तो उन्हों...
अनंत विजय
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राजेन्द्र यादव ने कभी उपेन्द्रनाथ अश्क पर लिखा था कि ‘शायद अपनी पीढ़ी में वो ही अकेले ऐसे हैं, जो उम्र और अवस्था की सारी दीवारें तोड़कर नये से नये लेखक से उसी के धरातल पर मिल सकते हैं, उसके कंधे पर हाथ मारकर हंसी मजाक कर सकते हैं और समान मित्र की तरह सलाह दे सकते ह...
अनंत विजय
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मशहूर लेखक धर्मवीर भारती के एक कहानी संग्रह का नाम है ‘बंद गली का आखिरी मकान’। भारती के इस कहानी संग्रह की काफी चर्चा हुई। एक जमाने में उस पुस्तक जितनी ही चर्चा हुई थी दिल्ली के दरियागंज इलाके के एक बंद गली के आखिरी मकान की। ये मकान था साहित्यिक पत्रिका हंस का कार्...
अनंत विजय
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हिंदी के मशहूर कथाकार और साहित्यिक पत्रिका ‘हंस’ के संपादक राजेन्द्र यादव हमेशा कहा करते थे कि विश्वविद्यालयों के हिंदी विभाग प्रतिभाओं की कब्रगाह हैं।  उनकी इस भावना का हिंदी के कई साहित्यकार समर्थन भी करते रहे हैं। यादव जी कहा करते थे कि विश्वविद्यालय और कॉल...
अनंत विजय
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एक थे राजेन्द्र यादव। हिंदी में कहानियां लिखते थे। हंस पत्रिका के संपादक थे। नामवर सिंह उनको विवादाचार्य कहते थे। राजेन्द्र यादव को विवादों में मजा आता था। उनके पास खबरों में बने रहने की कला थी। वो तब दुखी होते थे जब बहुत दिनों तक उनका नाम मीडिया में नहीं उछलता था,...
अनंत विजय
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पिछले दिनों एक साहित्यिक जमावड़े में आज के लेखकों के आचार-व्यवहार पर चर्चा हो रही थी। बहस इस बात पर हो रही थी कि साहित्य में निंदा-रस का कितना स्थान होना चाहिए। साहित्यकारों के बीच होनेवाले गॉसिप से लेकर एक दूसरे को नीचा दिखाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी चर्चा होने ल...
Bharat Tiwari
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हिंदी साहित्य में 'नई कहानी' को गढ़ने वाली त्रयी के महान कथाकार राजेन्द्र यादव की कहानी,गुलाम... रंगे स्यार को राज तो मिल गया, लेकिन समस्या यह आयी कि अब शासन कैसे चलाया जाये । जंगल में शेर-चीते, भालू-भेड़िये सभी थे और सब पर अपना हुक्म चलाना आसान नहीं था। उनमें स...
शिवम् मिश्रा
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सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।राजेंद्र यादव (अंग्रेज़ी:Rajendra Yadav, जन्म: 28 अगस्त 1929 - मृत्यु: 28 अक्टूबर 2013) हिन्दी साहित्य की सुप्रसिद्ध पत्रिका हंस के सम्पादक और लोकप्रिय उपन्यासकार थे। राजेंद्र यादव ने 1951 ई. में आगरा विश्वविद्यालय से एम.ए. (...
रणधीर सुमन
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राजेन्द्र यादव बाराबंकी किसानो को अब धर्म युद्ध लड़ना होगा| किसानो को जिन्दा रहने के लिए इस धर्म युद्ध में कौरवो का विनाश करना होगा| यदि किसान धर्म युद्ध में कौरवो का विनाश नहीं कर पाते है तो आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा| उक्त विचार ग्राम अजगना जहागीरा...
अनंत विजय
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हिदीं साहित्य में कविता, कहानी और उपन्यास के बाद जिस एक विधा ने पाठकों को अपने साथ सबसे अधिक जोड़ा उनमें आत्मकथा और संस्मरण का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। हिंदी में आत्मकथाओं की लंबी परंपरा रही है लेकिन इनमें से ज्यादातर आत्मकथाओं में लेखक खुद को कसौटी पर कस न...