ब्लॉगसेतु

jaikrishnarai tushar
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 चित्र -साभार गूगल चित्र साभार गूगल एक ग़ज़ल -पूनम की रात चाँद बहुत सादगी में है ये सारा आसमान  आज दिल्लगी में है पूनम की रात चाँद बहुत सादगी में है लिखता हूँ ,फाड़ता हूँ ,मिटाता हूँ हर्फ़ को कागज ,कलम ,दवात मेरी ज़िंदगी में है&nb...
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मेरे भइया तुम्हारी हो लम्बी उमर, कर रही हूँ प्रभू से यही कामना।लग जाये किसी की न तुमको नजर,दूज के इस तिलक में यही भावना।।चन्द्रमा की कला की तरह तुम बढ़ो,उन्नति के शिखर पर हमेशा चढ़ो,कष्ट और क्लेश से हो नही सामना।दूज के इस तिलक में यही भावना।।थालियाँ रोली चन्दन...
 पोस्ट लेवल : भ्रातृ दूज का तिलक
sanjiv verma salil
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पुस्तक समीक्षा- काल है संक्राति का- सुरेन्द्र सिंह पॅवार[कृति- काल है संक्राति का, ISBN 817761000-7, गीत-नवगीत संग्रह, कृतिकार- आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल, प्रकाशक- समन्वय प्रकाशन, 204 अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर 482001, मूल्य - 200/-]*‘काल है संक्रांति का’...
kumarendra singh sengar
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जो खुद गढ़ती है रूप हमारा,उस माँ का रूप कौन गढ़े....नवरात्रि पर्व की मंगलकामना  #हिन्दी_ब्लॉगिंग
ज्योति  देहलीवाल
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अक्सर लोगों को शिकायत रहती है कि साबूदाना वड़ा तलते वक्त फट जाते है या बहुत ज्यादा तेल पीते है या फ़िर क्रिस्पी नहीं बनते है। इन सभी समस्याओं का मैं समाधान लेकर आई हूं...दोस्तो, यह रेसिपी मैं मेरे शहर तुमसर वासियों की खास डिमांड पर शेयर कर रही हूँ। मैं ने अग्रसेन जयं...
sanjiv verma salil
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 ॐयह वेदोक्त रात्रि सूक्त है*नमन​ रात्रि! करतीं प्रगट, देश काल जड़-जीव।यथोचित​ दें कर्म-फल, जय माँ! करुणासींव।१।​*ओ​ देवी! हो अमर तुम, उछ-अधम में व्याप्त।नष्ट​ करो अज्ञान को, ज्ञान-ज्योति 'थिर आप्त।२।*पराशक्ति रजनी करें, प्रगट उषा को नित्य।नष्ट अविद्या-तिमिर हो...
sanjiv verma salil
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भाषा सेतु एक सुंदर बांग्ला गीत: सावन गगने घोर घनघटाबाङ्ला-हिंदी-गुजराती-छत्तीसगढ़ी  गर्मी से हाल बेहाल है। इंतजार है कब बादल आएं और बरसे जिससे तन - मन को शीतलता मिले। कुदरत के खेल कुदरत जाने, जब इन्द्र देव की मर्जी होगी तभी बरसेंगे। गर्मी से परेशान तन...
sanjiv verma salil
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सप्तम् स्वरूप कालरात्रिरेखा ताम्रकार 'राज'*सब को मारे उस काल की बन गई रात्रितब ही माता का नाम पड़ गया कालरत्रिचार भुजा वाली ये माता है त्रिनेत्र धारीदुष्टों को भय देती करे गर्दभ की सवारीभयंकर रूप धर भवानी रण में विचरतीअसुरों का नाश कर देवों की रक्षा करतीसाधक जो माँ...
 पोस्ट लेवल : दुर्गा कालरात्रि
sanjiv verma salil
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एक गीत -एक पैरोडी *ये रातें, ये मौसम, नदी का किनारा, ये चंचल हवा ३१ कहा दो दिलों ने, कि मिलकर कभी हम ना होंगे जुदा ३० *ये क्या बात है, आज की चाँदनी में २१ कि हम खो गये, प्यार की रागनी में २१ ये बाँहों में बाँहें, ये बहकी निगाहें २३ लो आने लगा जिंदगी का मज़ा १९ *सित...
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।१।जानते हैं सच तभी तो मौन हैं वो,और ज्यादा क्या कहें हम कौन हैं वो।जो हमारे दिल में रहते थे हमेशा-हरकतों से हो गए अब गौण हैं वो।।।२।दिल तो सूखा कुआँ नहीं होता,बिन लिखे मजमुआँ नहीं होता।लोग पल-पल की ख़बर रखते हैं-आग के बिन धुँआ नहीं होता।।।३।उनकी सौगात बहुत दूर गई,...