साँझ घिर आने से पहले,------------***-----------साँझ घिर आने से पहले,घर को लौट आना प्रिये...रात की खामोशियाँ भी,बिन तेरे तनहा सी है...है अगर शिक़वा गिला तो,खुल के तुम बतला भी दो...मेरी ये छोटी सी दुनिया,बिन तेरे तनहा सी है...कुछ लकीरों से बनी,क़िस्मत की ये बाज़ीगरी...क...