ब्लॉगसेतु

Basudeo Agarwal
305
अपने में ही बस मग्न, लोग क्यों सब हैं।जीवन के सारे मूल्य, क्षीण क्यों अब हैं।।हो दिशाहीन सब लोग, भटकते क्यों हैं।दूजों का हर अधिकार, झटकते क्यों हैं।।आडंबर का सब ओर, जोर है भारी।दिखते तो स्थिर-मन किंतु, बहुत दुखियारी।।ऊपर से चमके खूब, हृदय है काला।ये कैसा भीषण रोग,...
sanjiv verma salil
5
दोहा *महल खंडहर हो रहे, देख रहे सब मौन. चाह न महलों की करें, ऐसे कितने? कौन?*ॐछंद सलिला:राधिका छंदसंजीव*छंद-लक्षण: जाति महारौद्र लोक , प्रति चरण मात्रा २२ मात्रा, यति १३ - ९ ।ॐछंद सलिला:राधिका छंदसंजीव*छंद-लक्षण: जाति महारौद्र , प्रति चरण मात्रा २२ मात्रा, यति १३ -...
sanjiv verma salil
5
छंद कार्य शाला :राधिका छंद  लक्षण: २२ मात्रिक, द्विपदिक, समतुकांती छंद। विधान: यति १३-९, पदांत यगण १२२ , मगण २२२।  अभिनव प्रयोग गीत *क्यों मूल्य हुए निर्मूल्य, कौन बतलाए?क्यों अपने ही रह गए,न सगे; पराए।।  *तुलसी न उ...
sanjiv verma salil
5
छंद कार्य शाला :राधिका छंद १३-९ लक्षण: २२ मात्रिक, द्विपदिक, समतुकांती छंद.विधान: यति १३-९, पदांत यगण १२२ , मगण २२२ उदाहरण:१. जिसने हिंदी को छोड़, लिखी अंग्रेजी उसने अपनी ही आन, गर्त में भेजी निज भाषा-भूषा की न, चाह क्यों पाली?क्यों दुग्ध छो...
sanjiv verma salil
5
कार्य शालाराधिका छंद*लक्षण: बाईस मात्रिक द्विपदिक समतुकांती छंद।विधान: १३, ९ पर यति, पदांत यगण या मगण।  *लक्षण छंद:तेरा पै सज नव कला, राधिका रानी।लखि रूप अलौकिक मातु, कीर्ति हरखानी।।कहुं बर याके अनुहार, अहै बृजबाला।सुनि सब कहतीं व्हें मुदित, एक नंदलाला।। -जगन्...
 पोस्ट लेवल : राधिका छंद radhika chhand