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Basudeo Agarwal
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हर दल जो टुकड़ा टुकड़ा था, इस बार चुनावों ने छाँटा;बाहर निकाल उसको फेंका, ज्यों चुभा हुआ हो वो काँटा;जो अपनी अपनी डफली पर, बस राग स्वार्थ का गाते थे;उस भ्रष्ट तंत्र के गालों पर, जनता ने मारा कस चाँटा।इस बार विरोधी हर दल ने, ऐसा भारी झेला घाटा;चित चारों खाने सभी हुए,...
Basudeo Agarwal
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यह छंद मत्त सवैया के नाम से भी प्रसिद्ध है। पंडित राधेश्याम ने राधेश्यामी रामायण 32 मात्रिक चरण में रची। छंद में कुल चार चरण होते हैं तथा क्रमागत दो-दो चरण तुकान्त होते हैं। प्रति चरण पदपादाकुलक का दो गुना होता है l तब से यह छंद राधेश्यामी छंद के नाम से प्रसिद्धि प...