ब्लॉगसेतु

अनंत विजय
0
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने संसद में कुछ ऐसी बातें कहीं जिस पर, उनको लगता है कि चर्चा की जानी चाहिए। पहली बात तो उन्होंने ये कही कि भारत राष्ट्र नहीं है और ये राज्यों का संघ है। उन्होंने भारतीय जनता पा...
हर्षवर्धन त्रिपाठी
0
हर्ष वर्धन त्रिपाठीमेरे यूट्यूब चैनल से जुड़ेंब्राह्मणवादी शोषक व्यवस्था में हिन्दुस्तान में मुलायम सिंह यादव और उनका पूरा परिवार ब्राह्मण बन गयालालू प्रसाद यादव और उनका पूरा परिवार ब्राह्मण बन गयामायावती और उनके आशीर्वाद प्राप्त ब्राह्मण बन गएकरुणानिधि और उनका पूर...
girish billore
0
..............................
roushan mishra
0
जुलाई 2016 की बात है, हम शाहजहांपुर में थे। प्रशांत किशोर कांग्रेस के 2017 अभियान से जुड़ चुके थे ग़ुलाम नबी आज़ाद और राजबब्बर की अगुवाई में कांग्रेस की 27 साल यु पी बेहाल यात्रा निकल रही थी। हमारे एक परिचित, जो प्रशांत किशोर के संगठन में कार्यरत हैं , भी यात्...
sahitya shilpi
0
आज हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात है की हमें हर साल 26 जनवरी को गणतन्त्र  दिवस मनाने का मौका मिलता है| हर साल की तरह इस साल भी सभी को इस दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाए व इस दिवस पर पेश है मेरे नई बाल कविता "मेरे सपनों का भारत "    मेरे सपनों...
अनीता सैनी
0
बहुत दिनों से बहुत ही दिनों से  सुराही पर मैं तुम्हारी यादों के   अक्षर से विरह को सजा रही हूँ छन्द-बंद से नहीं बाँधे उधित भाव कविता की कलियाँ पलकों से भिगो कोहरे के शब्द नभ-सा उकेर रही हूँ। उपमा मन की मीत मिट्टी-सी महकी...
दिनेशराय द्विवेदी
0
वैसे तो धर्मों में आपस में मतभेद है। एक पूरब मुँह करके पूजा करने का विधान करता है, तो दूसरा पश्चिम की ओर। एक सिर पर कुछ बाल बढ़ाना चाहता है, तो दूसरा दाढ़ी। एक मूँछ कतरने के लिए कहता है, तो दूसरा मूँछ रखने के लिए। एक जानवर का गला रेतने के लिए कहता है, तो दूसरा एक हाथ...
मुकेश कुमार
0
प्रेम कविता लिखने की शर्त लगी थीइस तंज के साथ किआज तक मुझ पर नहीं रच पाया कोईप्रेम कविता !बिन कहे कुछसोचा किलिखूं तो क्या लिखूंहोंठ लिखूं या लिखूं गुलाब की गुलाबी पंखुडियांजो कभी हुआ करते थे प्रेम पत्र के साथरुमानियत भरने के लिएहुआ करता था जो जरूरीया फिर लिखने से प...
Kajal Kumar
0
 
0
 खाली बैठे रच दिया, मैंने दोहागीत।मर्म समझ लो प्यार का, ओ मेरे मनमीत।।--ढाई आखर में छिपा, दुनियाभर का सार।जो नैसर्गिकरूप से, उमड़े वो है प्यार।।प्यार नहीं है वासना, ये तो है उपहार।दिल से दिल का मिलन ही, इसका है आधार।।प्यारभरे इस खेल में, नहीं हा...