ये ऊँची मीनारें  इमारतें बहुमंज़िला रहते इंसान ज़मीर से मुब्तला। वो बाढ़ क़हर न झोपड़ी न रही रोटी राहत फंड से कौन करेगा मौज़। © रवीन्द्र सिंह यादव