ब्लॉगसेतु

S.M. MAsoom
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जौनपुर शहर गोमती नदी के किनारे बसा एक सुंदर शहर है जो अपना एक वि‍शि‍ष्‍ट ऐति‍हासि‍क, धार्मिक  एवं राजनैति‍क अस्‍ति‍त्‍व रखता है|  यहीं महर्षि‍ यमदग्‍नि‍ अपने पुत्र परशुराम के साथ रहा करते थे |बौध सभ्यता से ले कर रघुवंशी क्षत्रि‍यों वत्‍सगोत्री,...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लराज़ खुल जाने के डर में कभी रहा ही नहींकिसीसे, बात छुपाओ, कभी कहा ही नहींमैंने वो बात कही भीड़ जिससे डरती हैये कोई जुर्म है कि भीड़ से डरा ही नहीं !जितना ख़ुश होता हूं मैं सच्ची बात को कहकेउतना ख़ुश और किसी बात पर हुआ ही नहींकिसीने ज़ात से जोड़ा, किसीने मज़हब से...
prabhat ranjan
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एक आदमी ने लगभग पूरी जिंदगी लगाकर हिंदी फिल्म के गीतों का संकलन तैयार कर दिया. हरमन्दिर सिंह हमराज़ के हिंदी फिल्म गीत कोश उसी धुन का नतीजा है. उसके बारे में लिखा है सैयद एस. तौहीद ने- मॉडरेटर =====================अकेले आदमी ने वह कर दिखाया, जिसे संस्थाएं, बाज़ा...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लबिलकुल ही एक जैसी बातें बोल रहे थेवो राज़ एक-दूसरे के खोल रहे थेतहज़ीब की तराज़ू भी तुमने ही गढ़ी थीईमान जिसपे अपना तुम्ही तोल रहे थेअमृत तो फ़क़त नाम था, इक इश्तिहार थाअंदर तो सभी मिलके ज़हर घोल रहे थेवो तितलियां भी तेज़ थीं, भंवरे भी गुरु थेमिल-जुलके, ज़र्द फूल पे जो...
अजय  कुमार झा
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नरेंद्र मोदी ने चुनाव के बाद दिए गए अपने धन्यवाद  भाषण के दौरान ये कहा कि "राज़नीति में कोई दुश्मन नहीं होता" और इस बात को बहुत जल्दी ही वैश्विक फ़लक पे साबित भी कर दिया जब किसी की सोच और कल्पना से कोसों दूर वाले कदम , पडोसी और शाश्चत प्रतिद्वंदी देश पाकिस्तान क...
विनय प्रजापति
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सरफ़राज़ शाकिरसम्ते-कुहसार क्या है देखो तोआसमाँ झुक रहा है देखो तोबन गयी झील आइने जैसीअक्स उठा हुआ है देखो तोदूर तक नक़्शे-पा ही नक़्शे-पारास्ता हो गया है देखो तोमेरा साया जो साथ था अब तकरात से जा मिला है देखो तोपेड़ सारा बिखर गया लेकिनजूँ का तूँ घोंसला है देखो तोदश्त म...
विनय प्रजापति
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सरफ़राज़ शाकिरसिवांची गेट, मंगलियान की गली, जोधपुर, राजस्थानपेड़ पर पानी उगायें और देखेंधूप के कपड़े सिलायें और देखेंख़ाली-ख़ाली बादलों को छेड़ें चलकररेत को पट्टी पढ़ायें और देखेंघुप अन्धेरों से करें कुछ तो ठिठोलीरात भर हल्ला मचायें और देखेंदिल करें है हाथ धो लें जाँ से अप...
अमितेश कुमार
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( पिछले से जारी)इस बात से मुझे हरगिज इनकार नहीं कि फिल्म के आने से हमारे देश के ‘प्रोफेशनल’ थियेटर को बहुत नुकसान पहुंचा है। पर इस हकीकत को भी तस्लीम करना पड़ेगा कि प्रोफेशनल थियेटर में ऐसी कोई बात नहीं थी जो उसे ज्यादा दिनों तक जिन्दा रख सकती। इन कम्पनियों के पेश...
अमितेश कुमार
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एक ऐसे व्यक्ति के लिए जो सिनेमा और स्टेज दोनों में दिलचस्पी रखता हो, यह बताना बड़ा मुश्किल है कि वह दोनों में से कौन सा काम ज्यादा पसंद करता है, स्टेज का या फिल्म का। सच तो यह है कि इंसान को अपने हर काम में आनन्द आता है, बशर्ते कि वह काम पूरी मेहनत से, पूरी आजादी...
विनय प्रजापति
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शायिर: प्रो. ओम 'राज़'कौन था वह जो मुझे पहचान देकर चल दियाबे-रिदा1 तहरीर2 को उन्वान3 देकर चल दियाभूखे बच्चों की फ़क़त हसरत थी बासी रोटियाँमैं उन्हें पत्थर का एक भगवान देकर चल दियाआख़िरी सफ़र के शब4 में ग़ैर भी कुछ साथ थेअपनेपन का मैं उन्हें सम्मान देकर चल दियाउसने शिरक...