फ़ासले क़ुर्बतों में बदलेंगे एक रोज़, होने नहीं देंगे हम इंसानियत को ज़मी-दोज़। फ़ासले पैदा करना तो सियासत की रिवायत है,अदब को आज तक अपनी ज़ुबाँ की आदत है। आग बाहर तो दिखती है अंदर भी&nbs...