ब्लॉगसेतु

दिनेशराय द्विवेदी
57
दुर्घटना में बाबूलाल के पैर की हड्डी टूट गई और वह तीन महीने से दुकान नहीं आ रहा है। पूरे दिन दुकान छोटे भाई जीतू को ही देखनी पड़ती है। आज सुबह करीब 11:45 बजे मैं उसकी दुकान पर पहुंचा तो वह दुकान शुरू ही कर रहा था। जीतूमैंने उससे पूछा - तुम दुकान आने में काफी ल...
kumarendra singh sengar
24
कई वर्ष हो गए थे जंगलों की, बीहड़ों की धूल फांकते हुए. ग्रामीण अंचलों में जीवन गुजारते हुए. सीधा-साधा सा जीवन, साधारण से शौक, सामान्य सा रहन-सहन. न कभी कोई तड़क-भड़क पसंद की, न कभी अपनाई. अध्यापन कार्य से जुड़े थे तो पूरी ईमानदारी, मर्यादा से अपने दायित्वों का, कार्य क...
pradeep beedawat
536
http://www.patrika.com/news/raipur/raigarh-jindal-group-tortures-tribal-woman-to-acquire-her-lands-in-chhattisgarh-1266650/http://www.patrika.com/news/raipur/raigarh-jindal-group-tortures-tribal-woman-to-acquire-her-lands-in-chhattisgarh-1266650/जिन्दल तुम तो मर ह...
डॉ शिव राज  शर्मा
396
देश भक्ति का फैशननया नहीं है पुराना है इसको एक साल में दो बार तोआना ही आना है बाकी तो वही सारारिश्वत का अस्मत काफ़साना है न बदला है कुछ,न बदलेगा बस साल बदल जाना है ~~~~~~~~~~~~~~~~~~इस दिली इच्छा के साथ की अगले साल तक कुछ तो बदले ।...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
184
मीडिया के लिए मोदी की चाय पार्टी से सोशल मीडिया में जो हलचल मची है वह प्याले में तूफान की उक्ति चरितार्थ करती है। प्रिन्ट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की प्रायः सभी बड़ी हस्तियाँ जो देश की राजधानी में कार्यरत हैं उन्हें नरेन्द्र मोदी ने आदर सहित बुलाया, दीपावली की शुभकामना...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
184
जब भी सरकारी पक्ष की पैरवी करने किसी अदालत में जाता हूँ मन परेशान हो जाता है। न्याय के जिन मंदिरों में स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका के कर्णधार न्यायमूर्ति अपने फैसलों से देश के आम नागरिकों को भारतीय लोकतंत्र के प्रति आस्था बनाये रखने का संबल देते हैं उन्हीं के...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
184
आज के अखबार में ये विचलित करने वाले आंकड़े देखने को मिले- भारत में गरीब घरों के वे बच्चे जो लगातार चार साल स्कूल जाते रहे उनमें से 90 प्रतिशत बच्चे साक्षर ही नहीं हो सके। यही नहीं पाँच से छः साल तक स्कूल जाने के बावजूद 30 प्रतिशत बच्चों को अक्षर ज्ञान नहीं हो सका।...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
184
जीवन में जबसे कुछ सोचने समझने का सिलसिला शुरू हुआ शायद पहली बार ऐसा महसूस हो रहा है कि कैलेंडर की तारीख जब नये साल में प्रवेश करेगी तो हम एक बदले हुए भारत में पहुँच जाएंगे। अबतक तो यही मानता रहा हूँ कि इस अंग्रेजी कैलेंडर का साल बदलने से कुछ भी नहीं बदलता। लेकिन इस...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
184
चलो सितंबर सायोनारा...
विजय राजबली माथुर
74
स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )(ये दोनों चित्र हिंदुस्तान,लखनऊ के 17 मई 2012 अंक के हैं )(यह चित्र फेसबुक से लिया गया है और नीचे का नोट भी )Danda Lakhnaviआदमी भूख से मरता है और गेहूँ...