ब्लॉगसेतु

सुमन कपूर
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जलते हैं ज़िस्म श्मशानों में धुआँ धुआँ रूहें सर-ए-राह जब बेपर्दा हो निकलती हैं !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : रूह जिंदगी
रवीन्द्र  सिंह  यादव
121
अल्फ़ाज़ है कुछ माज़ी के दिल कभी भूलता ही नहींनये-पुराने घाव भर गए सारे  दर्द-ओ-ग़म राह ढूँढ़ता ही नहीं। उम्र भर साथ चलने का वादा है अभी से लड़खड़ा गए हो क्यों ?प्यास बुझती कहां है इश्क़ में साहिल पे आज आ गए हो क्यों ?गर  न  हों&nbsp...
अर्चना चावजी
72
वो सुंदरता का मुरीद था,होता भी क्यूँ न!मेरा दि&#2...
अर्चना चावजी
72
जब भी सावन आता है मुझे उसकी याद आती है। ...बात सन १९९३ जुलाई की है , मेरे पति सुनील के गंभीर एक्सीडेंट की खबर मुझे मिली , वे ऑफिस के कार्य से शिलॉन्ग गए हुए थे ,और मैं बच्चों के साथ रांची में थी। ... एक्सीडेंट के बाद उन्हें गौहाटी न्यूरोलॉजिकल रिसर्च सेंटर में लाया...
अर्चना चावजी
72
जब भी सावन आता है मुझे उसकी याद आती है। ...बात सन १९९३ जुलाई की है , मेरे पति सुनील के गंभीर एक्सीडेंट की खबर मुझे मिली , वे ऑफिस के कार्य से शिलॉन्ग गए हुए थे ,और मैं बच्चों के साथ रांची में थी। ... एक्सीडेंट के बाद उन्हें गौहाटी न्यूरोलॉजिकल रिसर्च सेंटर में लाया...
केवल राम
314
लेकिन दो से एक होने के मायने और एक और एक होने के मायने बहुत अलग हैं. मैं उसे यही बात समझाने की कोशिश करता, लेकिन उसे लगता कि प्रेम में सिद्धान्त का क्या काम, वहां तो मौज-मस्ती है, घूमना फिरना है, गप्पें मारना है, मिलना-जुलना है और फिर एक उम्र के बाद शादी के बन्धन म...
केवल राम
314
एक दिन मैं अपने मित्र से बात कर रहा था. बातों-बातों में बात प्रेम के विषय तक आ पहुंची. बात-बात में मैंने महसूस किया कि वह अपने प्रेम को लेकर संशय की स्थिति में है. वह अपने प्रेम के अनुभवों और भविष्य की स्थितियों को लेकर बहुत असमंजस में था. उसे लग रहा था कि कहीं वह...
सरिता  भाटिया
159
रूह के रिश्ते होते हैं अजीब न समझो तो हैं दूर,जो समझो तो हैं बहुत करीबरूह के रिश्ते जो बिन देखे बन जाते हैं अगर जो न मिल पायें तो जीवन भर तड़पाते हैं रूह के रिश्तों  को तोड़कर हो पाता नहीं कोई गैर दूर चाहे जितना रहें ...
 पोस्ट लेवल : रिश्ता रूह
अर्चना चावजी
72
आज मन हुआ है उन मुलाकातों को अंकित करने का जो हुई अंतर्जाल की दोस्ती के बाद ...जब ब्लॉग लिखना शुरू हुआ तो लोगों से परिचय बढ़ने लगा.....बातचीत होने लगी ...बहुत ब्लॉगरों से चैट पर समस्याएँ साझा की और हल निकाले .....पर मुलाक़ात शुरू हुई संजय कुमार चौरसिया जी से जिनकी एक...
अर्चना चावजी
72
आपको विश्वास हो या न हो पर ये बिलकुल सच है ....ईश्वर से सच्चे मन से मांगो तो मुराद पूरी होती है ,जब तक उसके हाथ में है.....(मुझे लगता है ,कई बार उसके हाथ में भी नाही रहता कुछ ).कई बार मुझे महसूस हुआ है की वो मेरी सुनता है .....पिछली बार कब सुना था ये फिर कभी बताउंग...