ब्लॉगसेतु

Kailash Sharma
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कितनी दूर चला आया हूँ,कितनी दूर अभी है जाना।राह है लंबी या ये जीवन,नहीं अभी तक मैंने जाना।नहीं किसी ने राह सुझाई,भ्रमित किया अपने लोगों ने।अपनी राह न मैं चुन पाया,बहुत दूर जाने पर जाना।बढ़े हाथ उनको ठुकराया,अपनों की खुशियों की खातिर।लेकिन आज सोचता हूँ मैं,अपने दिल क...
sanjiv verma salil
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नीता कुकरेतीजन्म  - ७ सितंबर १९५२,  नरेन्द्रनगर, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखण्ड। जीवन साथी - श्री हेमवती नन्दन कुकरेती। शिक्षा - एम.ए. (अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान), एम.एड.। संप्रति - सेवा निवृत्त प्रधानाचार्या। प्रकाशन -...
Sandhya Sharma
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 ख़यालों के पंख लगाकरख़्वाबों की उड़ान भरकरकितनी भी दूर क्यों न चली जाएलेकिन लौट आती है "मेरी नज़्म"उतर आती है ज़मी परमेरे साथ नंगे पाँव घूमती हैपत्ता-पत्ता, डाल-डाल, बूटा -बूटाइसलिए तो तरोताज़ा रहती हैजब कभी यादों के सात समंदर पार करकेथककर निढाल हो जाती हैतो बैठ जा...
मुकेश कुमार
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सफ़र के आगाज में मैं था तुम साजैसे तुम उद्गम से निकलती तेज बहाव वाली नदी की कल कल जलधाराबड़े-बड़े पत्थरों को तोड़तीकंकड़ों में बदलती, रेत में परिवर्तित करतीबनाती खुद के के लिए रास्ता.थे जवानी के दिनतभी तो कुछ कर दिखाने का दंभ भरतेजोश में रहते, साहस से लबरेज&nb...
मधुलिका पटेल
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एक उम्र जो गुम हो गई आज बहुत ढूंढा मैंनेअपनी उम्र को पता नहीं कहाँ चली गई नहीं मिलीरेत की तरह मुट्ठी से फिसल गईया रेशा रेशा हो कर हवा में उड़ गईबारिश की बूँद की तरहमिट्टी में गुम हो गईसूरज की किरणों के साथपहाड़ों के पीछे छिप गईवो मुझे जैसे छू...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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कैसा दौर आया हैआजकलजिधर देखो उधरहवा गर्म हो रही हैआया था चमन मेंसुकून की सांस लेनेवो देखो शाख़-ए-अमन परफ़ाख़्ता बिलख-बिलखकर रो रही है।दोस्ती का हाथबढ़ाया मैंने फूलों की जानिबनज़र झुकाकर फेर लिया मुँहशायद नहीं है वक़्त मुनासिबसितम दम्भ और दरिंदगी के सर...
VMWTeam Bharat
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बीते कई दिनों से चर्चाओं में आए चोटी कटवा को लेकर हर कोई सच्चाई जानना चाहता है । हर कोई जानना चाहता है कि आखिर क्या है चोटी कटवा?  इसको लेकर बड़े-बड़े टीवी चैनलों से लेकर अखबारों और वेब मीडिया में भी सुर्खियां बनी हुई है । तो वही सरकार से लेकर पुलिस...
Bhavna  Pathak
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मेरे जैसे साधारण इंसान के पास यादों के अलावा और हो भी क्या सकता है। हां,अगर म्युनिस्पैलिटी का बाबू होता, पीडब्ल्यू डी या रजिस्ट्रार आफिस का चपरासी भी होता तो बात कुछ और थी। अब इनहें ही खजाना कह कर खुश हो लेता हूं। वैसे ही जैसे गरीब गुड़ के टुकड़े को शाही टुकड़ा या...
girish billore
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Kavita Rawat
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