ब्लॉगसेतु

Shachinder Arya
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दिल्ली हमारे सपनों का शहर। हम कभी सपनों में भी दिल्ली नहीं आपाते। अगर हमारी दादी ने हमारे पापा को बाहर पढ़ने के लिए भेजा न होता। तब यहाँ रहना तो दूर, इसे कभी छू भी नहीं पाते। हम दिल्ली रोज़ सुनते, पर कभी इसे देख नहीं पाते। हम भी वहीं चार-पाँच साल पहले तुमसे शादी और द...
Shachinder Arya
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किसी खाली सुनसान स्टेशन के ‘प्लेटफ़ॉर्म’ की तरहउस अकेलेपन में इंतज़ार कर देखना चाहता हूँकैसा हो जाता होगा वह जब कोई नहीं होता होगाकोई एक आवाज़ भी नहींकहीं कोई दिख नहीं पड़ता होगाबस होती होगी अंदर तक उतरती खामोशीदूर तक घुप्प अँधेरे सा इंतज़ार करता ऊँघता ऊबताकि इस अँधेरे...