ब्लॉगसेतु

Saransh Sagar
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बेटी की पुकार ( पर जन्म से पहले न देना मार )जो देते हो औरों को प्यारछीन ना लेना, मुझसे मेरा अधिकारचाहे ना देना, मुझको ऐसा दुलारपर जन्म से पहले न देना मारबस मांग रही हूँ ये उपहार जग में आने का दे दो अधिकारइतनी सी है मेरी पुकार मांग रही हूँ बस जग का प्...
Saransh Sagar
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  प्रस्तुत कविता रौशनी कुमारी द्वारा रचित है जो ( खोड़ा ) गाजियाबाद क्षेत्र की निवासी है व् राजकीय डिग्री कॉलेज की छात्रा व् सामाजिक कार्यकर्ता एवं चैलेंजर्स ग्रुप ( पंजीकृत ) की सदस्य है  !________________________________________________________प्यार...
Saransh Sagar
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जिंदगी से यूँ मायूस न हो ख़ुशी का कोई किनारा तो होगा !!इस दुःख से भरी कश्ती मेंउस रब ने तुझे यूँ ही न उतारा होगा !!                       इस मतलब की दुनिया में  कोई तो तेरा सहारा होगा !!उठ और लड़ अ...
मधुलिका पटेल
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मीलों दूर तक पसरे हुए ये रास्तेकभी कभी बोझिल हो जाते हैं कदम जाने पहचाने रास्तों को देर नहीं लगती अजनबी बनने में जब सफर होता है तन्हाऔर मंज़िलें होती गुमरौशनी में नहाये हुए बाज़ार रौनकों से सजी हुई दुकाने पर मैं कुछ अलहदा ढूंढ़ रही हूँ खर...
मधुलिका पटेल
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सोचना समझना और चलना उन रास्तों पर पर फिर कभी न निकल पाना उन बंधनो से जो वक़्त के साथ बंधते और कस्ते जाते हैं |एक अजगर की पकड़ की तरह जहाँ दम घुटने के अलावा कुछ नहीं है जो दिन रात आपका सुख चैन निगल रहा है और धीरे - धीरे आपको भी |पर ज़िन्दगी अगर...
Ravindra Pandey
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उम्मीद-ए-रौशनी में, मैं शब गुजार लेता हूँ...धड़कनों की सरगम से, सुर उधार लेता हूँ...काफ़िले वो खुशियों के, मेरी गली आएँगे...देख के आईना, खुद को संवार लेता हूँ...छोड़िये वो बातें, जो दिल को दुखा देती हैं...एक मुस्कुराहट पे, सब कुछ निसार देता हूँ...धूप मुलाकातों की, इसल...
मुकेश कुमार
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"लो मीडियम इनकम ग्रुप" के लोग मतलब इतनी सी आमदनी कि, बस पेट ही भर सकेपर है, चाहत यह भी किरख सके एकाध निवाले शेष हो घर की दीवारों पर मटमैली सी रौशनी लेकिन दरवाजे पर झीने परदे के टंगने के लिए कर रहे इन्तजार अगले दीपावली पर बोनस का बहुत सोच-समझ कर जलाये हैप्पी...
kavita verma
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नेपथ्य तेल चाल उखड़ी सांसे थकित तन और डूबता मन लिए वह चला जा रहा था कहाँ खुद भी नहीं जानता। उदासी ज्यादा गहरी थी या अन्धकार ये सोचने का ध्यान कहाँ था। आगे रास्ता है या नहीं ये समझने की कोशिश ही कहाँ की बस चलता रहा मानो मन की गति को मात देने भाग रहा हो बिना रुके...
 पोस्ट लेवल : रौशनी सागर
Sandhya Sharma
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बिलकुल नए अँधेरे में आँखें मूंदकर देखेनवस्वप्न....क्या होगा इनकासाकार होंगेया टूट जायेंगेटूटना कोई नई बात नहीं साध्य पीढ़ी नईमेरी दृष्टी प्राचीन तो क्या हुआजब रौशनी है आकाश हैआशाओं का भयावह काली रातबीत जाएगीउम्मीद है सूरज निकलने कीहौसला है क्षितिज छूने काहमसे बचकर क...