पसीने से लथपथ बूढ़ा लकड़हारा पेड़ काट रहा है शजर की शाख़ पर तार-तार होता अपना नशेमन अपलक छलछलाई आँखों से निहार रही हैएक गौरैया अंतिम तिनका छिन्न-भिन्न होकर गिरने तक किसी चमत्कार की प्रतीक्षा में विकट चहचहाती रही न संगी...