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विजय राजबली माथुर
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Naish Hasan 26-01-2020  at  11:20 pm  ·जम्हूरियत का जश्न मनाती ये लखनऊ की बेटियां।ऐसा गणतंत्र दिवस पहले कभी नही देखा, आज ये त्योहार 25000 लोगो के साथ मनाया।   ~विजय राजबली माथुर ©
विजय राजबली माथुर
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Virendra Yadav 26-01-2020 आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर लखनऊ के 'शाहीनबाग ' ऐतिहासिक घंटाघर पार्क में अभूतपूर्व जनसैलाब था। घंटाघर की चारों दिशाओं में तिरंगे ही तिरंगे, हवा में गूंजते नारे और आजादी के तराने। आंचल सचमुच परचम बन गए थे, जिनके बुर्के अभी नहीं उत...
विजय राजबली माथुर
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  Naish Hasan· उजरियांव शाहीनबाग, क्या कहती है बहने सुनिए, ये समीना किदवई हैं। ~विजय राजबली माथुर ©
jaikrishnarai tushar
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डॉ ० सदानन्दप्रसाद गुप्त कार्यकारी अध्यक्ष उ०प्र०हिन्दी संस्थान ,लखनऊ सबसे दायें माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथसबसे बाएं श्री शिशिर सिंह निदेशक हिंदी संस्थान सबसे मध्य में डॉ ० सदानन्दप्रसाद गुप्त जी साहित्य मनीषी डॉ ० सदानन्दप्रसाद गुप्...
sanjiv verma salil
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बुधिया लेता टोह : चीख लगे विद्रोहस्वातंत्र्योत्तर भारतीय साहित्य छायावादी रूमानियत (पंत, प्रसाद, महादेवी, बच्चन), राष्ट्रवादी शौर्य (मैथिली शरण गुप्त, माखन लाल चतुर्वेदी, दिनकर, सोहनलाल द्विवेदी) और प्रगतिवादी यथार्थ (निराला, नागार्जुन, त्रिलोचन, मुक्तिबोध) के संगु...
 पोस्ट लेवल : ५ समीक्षाएं लखनऊ
विजय राजबली माथुर
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    ~विजय राजबली माथुर ©
विजय राजबली माथुर
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Girish CPI7:09 PM (6 minutes ago)लखनऊ 1 सितम्बर। भाकपा राज्य मुख्यालय पर आज प्रेस प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए भाकपा के नव निर्वाचित महासचिव डी. राजा, सांसद ने जम्मू एवं कश्मीर के बारे में बोलते हुए कहा कि उन्होंने दो बार राज्य का दौरा करने का प्रयास किया परन्...
विजय राजबली माथुर
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Arvind Raj Swarup Cpi13 hrs · लखनऊ,9 जुलाई 2019जानें मानें पत्रकार और नेता कॉम शमीम फ़ैज़ी को लखनऊ नें श्रधांजलि दी।जानें मानें पत्रकार और सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव मंडल के सदस्य कॉम शमीम फ़ैज़ी को कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य मुख्यालय पर श्रधांजलि दी गई।उनका नि...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )इमरजेंसी यानी आपातकाल स्वतंत्र भारत के इतिहास के काले दौर के तौर पर याद किया जाता है। 25 जून की आधी रात को तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने त...
विजय राजबली माथुर
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चुनावी राजनीति के शोर में हम अपने देश और समाज की मुश्किलों को, उसके संकटों को कैसे समझें? राजनीति की चालाक बयानबाज़ियों से दूर कोई मासूम आवाज़ ही यह सच कह सकती है. दिक्कत ये है कि हम उस तक पहुंचने की, उसकी बात सुनने की फ़ुरसत नहीं निकालते, इसके लिए ज़रूरी सब्र नहीं दिख...