ब्लॉगसेतु

ऋता शेखर 'मधु'
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 लघुकथा- लंच बॉक्सदसवीं कक्षा की क्लास लेते हुए अचानक सुधा मैम ने पूछा," बच्चों, यह बताओ कि आज सुबह का नाश्ता किये बगैर कौन कौन आया है।"एक छात्रा ने हाथ उठाया।" क्या घर में कुछ बन नहीं पाया था""बना था, पर उसे छोटी बहन के लंच बॉक्स में मम्मी ने देकर भेजा।"...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
sanjiv verma salil
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लघुकथा सबक *'तुम कैसे वेलेंटाइन हो जो टॉफी ही नहीं लाये?'''अरे उस दिन लाया तो था, अपने हाथों से खिलाई भी थी. भूल गयीं?'''भूली तो नहीं पर मुझे बचपन में पढ़ा सबक आज भी याद है. तुमने कुछ पढ़ा-लिखा होता तो तुम्हें भी याद होता.'''अच्छा, तो मैं अनपढ़ हूँ क्या?'''मुझे क्या प...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा सबक
sahitya shilpi
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भूख [लघुकथा] – मनोज शर्मा दिन कितना हरा भरा था पर शाम होते होते सबकुछ धुंधला अस्पष्ट सा नज़र आने लगा। घर के बाहर बल्ब की मद्धिम रोशनी कुछ दूर जल रहे होलिजन लाइट में कहीं गुम हो रही थी। गली के एक कोने में दो तीन कुत्तों के भौंकने की आवाज़ हुई जिसको सुनकर और कुत्ते भ...
sahitya shilpi
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दो साल पहले की ही बात है, शर्मा जी के पड़ोस में चोरी हो गई थी। चोरी कोई बड़ी नहीं थी, गुप्ता जी की पुरानी कार चोर ले गया था। शर्मा जी ने फिर भी पड़ोसियों को समझाया कि मोहल्ले के दोनों ओर लोहे के गेट लगवा लेते हैं। चोरी की संभावना समाप्त हो जाएगी। एक गार्ड को ड्यूटी...
 पोस्ट लेवल : नीरज त्यागी लघुकथा
sanjiv verma salil
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लघुकथा:ठण्ड *संजीव बाप रे! ठण्ड तो हाड़ गलाए दे रही है। सूर्य देवता दिए की तरह दिख रहे हैं। कोहरा, बूँदाबाँदी, और बरछी की तरह चुभती ठंडी हवा, उस पर कोढ़ में खाज यह कि कार्यालय जाना भी जरूरी और काम निबटाकर लौटते-लौटते अब साँझ ढल कर रात हो चली है। सोचते हुए उ...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा ठण्ड
sanjiv verma salil
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*कुंडलिया वादे कर जो भुला दे, वह खोता विश्वास.ऐसे नेता से नहीं, जनता को कुछ आस.जनता को कुछ आस, स्वार्थ ही वह साधेगा.भूल देश-हित दल का हित ही आराधेगा.सलिल कहे क्यों दल-हित को जनता पर लादे.वह खोता विश्वास भला दे जो कर वादे १९-१२-२०१७ *शिवमय दोहे ल...
sanjiv verma salil
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लघुकथा - समरसता *भृत्यों, सफाईकर्मियों और चौकीदारों द्वारा वेतन वृद्धि की माँग मंत्रिमंडल ने आर्थिक संसाधनों के अभाव में ठुकरा दी।कुछ दिनों बाद जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्य कुशलता की प्रशंसा कर अपने वेतन भत्ते कई गुना अधिक बढ़ा लिये।अगली...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
sanjiv verma salil
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लघुकथा: जंगल में जनतंत्र -आचार्य संजीव 'सलिल'*जंगल में चुनाव होनेवाले थे।मंत्री कौए जी एक जंगी आमसभा में सरकारी अमले द्वारा जुटाई गयी भीड़ के आगे भाषण दे रहे थे।- ' जंगल में मंगल के लिए आपस का दंगल बंद कर एक साथ मिलकर उन्नति की रह पर कदम रखिये। सिर्फ़ अपन...
sanjiv verma salil
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लघुकथा लेखन कक्षा १० वीं ५ अंकों का प्रश्न*- लघु = छोटी, कथा = कहानी - बब्बा-दादी, नाना-नानी, माँ, दीदी आदि कहानी कहती हैं। कहानी और लघुकथा कहानी लंबी होती है। उसमें बहुत सी घटनाएँ होती हैं। कहानी में अनेक पात्र होते हैं। लघु...
sanjiv verma salil
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