ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
6
लघुकथामोहनभोग*'क्षमा करना प्रभु! आज भोग नहीं लगा सका.' साथ में बाँके बिहारी के दर्शन कर रहे सज्जन ने प्रणाम करते हुए कहा.'अरे! आपने तो मेरे साथ ही मिष्ठान्न भण्डार से नैवेद्य हेतु पेड़े लिए था, कहाँ गए?' मैंने उन्हें प्रसाद देते हुए पूछा.पेड़े लेकर मंदिर आ रहा था कि...
 पोस्ट लेवल : मोहनभोग लघुकथा
sanjiv verma salil
6
लघुकथाअकेले*'बिचारी को अकेले ही सारी जिंदगी गुजारनी पड़ी।''हाँ री! बेचारी का दुर्भाग्य कि उसके पति ने भी साथ नहीं दिया।''ईश्वर ऐसा पति किसी को न दे।'दिवंगता के अन्तिम दर्शन कर उनके सहयोगी अपनी भावनाएँ व्यक्त कर रहे थे।'क्यों क्या आप उनके साथ नहीं थीं? हर दिन आप सब स...
 पोस्ट लेवल : अकेले लघुकथा
रवीन्द्र  सिंह  यादव
241
         समीर उस दिन पंद्रह मिनट पहले कॉलेज के लिए निकला था। उसे अपने दाएँ पैर के जूते की मरम्मत करवानी थी।लगभग चालीस की उम्र पार चुका सुखलाल ग्राहक की प्रतीक्षा में व्याकुल था। इस बीच एक सप्ताह पुराने अख़बार की हैडिंग पढ़ने की...
sanjiv verma salil
6
 ०१. अरुण अर्णव खरे  गद्य-पद्य दो छोर हैं, अरुणार्णव लें जान खरे खरे रच रहे हैं जीवन में प्रतिमान०२. ओम नीरवनीरव में गुंजित हुआ, नूतन रचना गान ॐ दसों दिश व्याप्त है, लय लीनित मतिमान ०३. ओमप्रकाश क्षत्...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा ???
Roli Dixit
124
कल एक उदास सी दोपहर में कुछ नहीं करने के इरादे से कुछ नहीं सोच रही थी मैं. जब कुछ नहीं करती हूँ तो घुप्प अंधेरी जगह पर बैठना पसंद करती हूँ. तभी फ़ोन की घण्टी बजी. मन न होते हुए भी उठाना पड़ा. इन दिनों जीने की ऐसी इच्छा जगी कि ख़ुद में एकाकीपन भर लिया ताक़ि मन को आवाज़ क...
sanjiv verma salil
6
लघुकथा:एकलव्य- 'नानाजी! एकलव्य महान धनुर्धर था?'- 'हाँ; इसमें कोई संदेह नहीं है.'- उसने व्यर्थ ही भोंकते कुत्तों का मुंह तीरों से बंद कर दिया था ?'-हाँ बेटा.'- दूरदर्शन और सभाओं में नेताओं और संतों के वाग्विलास से ऊबे पोते ने कहा - 'काश वह आज भी होता.'*****- आचार्य...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा: एकलव्य
Roli Dixit
124
दोनों ने अपनी उंगलियाँ एक दूसरे में फँसाते हुए इश्क़ को यूँ गले से लगा लिया जैसे आज इश्क़ इनका गुलाम हो गया है. हो भी कैसे ना इश्क के अलावा रहा ही क्या उनकी ज़िंदगी में! होती होगी लोगों की सुबह, दोपहर, शाम, रात इनका तो बस इश्क़ होता है.आन्या ने जिब्रान को टटोलते हुए अप...
 पोस्ट लेवल : कहानी लघुकथा प्रेम
रवीन्द्र  सिंह  यादव
241
        तफ़तीश-अफ़सर को देखकर सबने अपने-अपने खिड़की-दरवाज़े बंद कर लिए। तरबूज़, ख़रबूज़ा और ककड़ी आवाज़ लगाकर बेचता एक ठेलेवाला आ गया। अफ़सर ने सोचा अब तो शायद कोई न कोई तो बाहर निकलेगा ही लेकिन कमाल का आंतरिक सामंजस्य है इन ख़ामोश मकानों में कि बच्चा...
ज्योति  देहलीवाल
59
राणी सती का मंगलपाठ होने के बाद जैसे ही शिल्पा घर जाने के लिए बाहर की ओर जा रही थी तो उसे जानी-पहचानी आवाज सुनाई दी, ''शिल्पा...'' 65 साल की उम्र में उसके नाम से पुकारने वाले बहुत ही कम लोग थे। उसने पीछे मुडकर देखा तो उसके गांव की उसकी पड़ोसन कम पक्की सहेली लता थी।...
ऋता शेखर 'मधु'
119
महँगा कचरा “दादी, सब कहते हैं कि हम मनुष्यों ने पर्यावरण का बहुत नुकसान किया है| पर मुझे तो ऐसा कुछ नहीं दिखता, आपको दिखता है क्या? ,” रेस्तरां में बैठे दस वर्षीय पीयूष ने बर्गर खाते हुए सवाल किया| “बिल्कुल दिखता है पीयूष, मैं तो अभी ही गिना सकती हूँ कि बर्गर खाते...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा