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रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : लघुकथा
रविशंकर श्रीवास्तव
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रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : लघुकथा
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : लघुकथा लघु कथा
Meena Bhardwaj
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उसकी दिनचर्या तारों भरी भोर से आरम्भ हो अर्द्धरात्रि में नीलाकाश की झिलमिल रोशनी के साथ ही समाप्त होती थी । अक्सर काम करते करते वह प्रश्न सुनती - "तुम ही कहो ? कमाने वाला एक और खाने वाले दस..मेरे बच्चों का भविष्य मुझे अंधकारमय ही दिखता है ।" और वह सोचती रह जाती..,त...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
ANITA LAGURI (ANU)
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"वाह...!  क्या जादू है तुम्हारे हाथों में,तुम्हारे हाथों से बनी चाय पीकर तो लगता है कि जन्नत के दर्शन हो गये।  सच कहता हूँ सुधा, शादी की पहली सुबह और आज 50 साल बीत जाने के बाद भी तुम्हारे हाथों की बनी चाय में कोई फ़र्क़ नहीं आया।" श्याम जी कहते-कह...
रविशंकर श्रीवास्तव
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