ब्लॉगसेतु

Roshan Jaswal
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बड़े गुस्से से मैं घर से चला आया ..इतना गुस्सा था की गलती से पापा के ही जूते पहन के निकल गयामैं आज बस घर छोड़ दूंगा, और तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा …जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते थे, तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें है …..आज मैं पापा का पर्स भी उ...
sanjiv verma salil
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एक लघु कथा - एक चर्चा खास रिश्ते का स्वप्नकान्ता राॅय, भोपाल*" ये क्या सुना मैने , तुम शादी तोड़ रही हो ? "" सही सुना तुमने । मैने सोचा था कि ये शादी मुझे खुशी देगी । "" हाँ ,देनी ही चाहिए थी ,तुमने घरवालों के मर्ज़ी के खिलाफ़, अपने पसंद से जो की थी ! ""...
sanjiv verma salil
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लघुकथा:बाजीगर*- आपका राज्य पिछले वर्षों में बहुत पिछड़ गया है आप अमुक दल की सरकार बनाइये और अपने राज्य को उन्नत राज्यों में सम्मिलित करिये।- आपका प्रान्त अब तक आगे नहीं बढ़ सका, इसके कसूरवार वे हैं जो खुद को सम्पूर्ण क्रांति का मसीहा कहते रहे किन्तु सरकार बनाने के बा...
 पोस्ट लेवल : laghukatha संजीव sanjiv लघुकथा
sanjiv verma salil
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लघुकथा:अट्टहास*= 'वाह, रावण क्या खूब जल रहा है?'- 'तो इसमें ख़ुशी की क्या बात है?'= ख़ुशी की बात तो है ही. जैसा करा वैसा भर। पाप का फल ऐसा ही होता है.__ झूठ, बिलकुल झूठ. रावण के पुतले में से आवाज़ आई.= झूठ क्यों? यही तो सच है.__ 'यदि यह सच होता तो आज मैं नहीं, इस देश...
sanjiv verma salil
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लघुकथा: बाजीगर *- आपका राज्य पिछले वर्षों में बहुत पिछड़ गया है आप अमुक दल की सरकार बनाइये और अपने राज्य को उन्नत राज्यों में सम्मिलित करिये। - आपका प्रान्त अब तक आगे नहीं बढ़ सका, इसके कसूरवार वे हैं जो खुद को सम्पूर्ण क्रांति का मसीहा कहते रहे किन्तु...
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sanjiv verma salil
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आलेख :लघुकथा : एक परिचयसंजीव वर्मा 'सलिल' *हिंदी साहित्य की लोकप्रिय विधा है. हिंदी साहित्य की अन्य विधाओं की तरह लघुकथा का मूल भी संस्कृत साहित्य में हैं जहाँ बोध कथा, दृष्टान्त कथा, उपदेश कथा के रूप में वैदिक-पौराणिक-औपनिषदिक काल में इसका उपयोग एक अथवा अनेक...
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sanjiv verma salil
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लघुकथा:जले पर नमक*- 'यार! ऐसे कैसे जेब कट गयी? सम्हलकर चला करो.'= 'कहते तो ठीक हो किन्तु कितना भी सम्हलकर चलो, कलाकार हाथ की सफाई दिखा ही देता है.'- 'ऐसा कहकर तुम अपनी असावधानी पर पर्दा नहीं डाल सकते।'= 'पर्दा कौन कम्बख्त डाल रहा है? जेबकतरे तो पूरी जनता जनार्दन की...
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sanjiv verma salil
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लघुकथाः जेबकतरे :* = १९७३ में एक २० बरस के लड़के ने जिसे न अनुभव था, न जिम्मेदारी २८०/- आधार वेतन पर नौकरी आरंभ की। कुल वेतन ३७५/- , सामान्य भविष्य निधि कटाने के बाद ३५०/- हाथ में आते थे जिससे पौने तीन तोले सोना खरीदा जा सकता&...
Roshan Jaswal
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अपनी कोठी में कुछ काम कराने के लिए बाबू रामदयाल पास ही के चौराहे से एक मजदूर को पकड़ लाए। वह एक लुंगी और पुराने, जगह-जगह से पैबंद कुरते में था।बाबू रामदयाल उसे लेकर पैदल ही आ रहे थे। उन्होंने पूछा, ‘‘क्या नाम है तेरा?’’‘‘जी बाबू.... सुखी राम।’’बाबू रामदयाल मन-ही-मन...
रविशंकर श्रीवास्तव
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