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रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : लघुकथा
रविशंकर श्रीवास्तव
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बरसात से पूर्व घर में कुछ छुट-पुट मरम्मत का कार्य करवाना था। एक अदद राज मिस्त्री और दो मजदूरों की जरूरत थी। इन्हें लाने के लिए चौराहे पर गया। 500 रु0 प्रतिदिन मजदूरी के हिसाब से राज-मिस्त्री तो मिल गया।अब मजदूर खोजने लगे। 2-4 लोगों से कहा कि मजदूरी पर चलोगे।उन...
संतोष त्रिवेदी
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कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी।कुल्हड़ में चाय छनकर आ गई थी पर घने कोहरे के कारण हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था।चाय कुल्हड़ में ही पड़ी-पड़ी जमने लगी थी।अचानक मिले इस जीवनदान से चाय का हौसला बढ़ गया।उसने कुल्हड़ को थोड़ी-सी कुहनी मारी और कहने लगी--‘मेरे मन की बात सुनोगे ?’ कुल्हड़ प...
ऋता शेखर 'मधु'
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भटकन-''नेहा, आज शाम को मुकेश के यहाँ पार्टी है, उसकी बेटी का जन्मदिन है, तैयार रहना'',दफ्तर से पंकज ने फोन किया|''मगर मैं कैसे जा पाऊँगी, माँजी घर में अकेली रह जाएँगी'',नेहा ने मद्धिम स्वर में कहा|''तो फिर ठीक है, मैं ही चला जाऊँगा'', कहकर पंकज ने फोन काट दिया|नेहा...
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संतोष त्रिवेदी
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पहला दृश्यस्कूल की घंटी उदास है।आज उससे मिलने न कोई हथौड़ा आया और न ही कोई बजानेवाला।उसे लगता नहीं कि फिर कभी वह पहले जैसा बज पायेगी।पहले उसे अपने बजने पर बहुत दर्द होता था,पर अब तो कोई दर्द ही महसूस नहीं होता।उसे लगता है कि कोई उसे जोर से बजाये ताकि वह अपने होने का...
रविशंकर श्रीवास्तव
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