ब्लॉगसेतु

Roshan Jaswal
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Suman Kapoorअरे , कितनी सुंदर शाल है स्वाति.... कहाँ ली ? तुम पर बहुत फब रही । ऑफिस पहुँचते ही स्वाति की सहयोगी लड़की ने पूछा । ये मेरे दोस्त .... कहते कहते स्वाति चुप हो गई । अजीब सी उदासी छा गई उसके चेहरे पे और वो अपनी सीट पर आकर बैठ गई । बीते लम्हें एक एक करके उ...
 पोस्ट लेवल : सुमन'मीत' लघुकथा
Roshan Jaswal
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आज नेता जी फिर हमारे गाँव आ रहे थे | दस बर्ष के अंतराल बाद | पहली बार वह तब आये थे जब उनकी जीत हुई थी और इस क्षेत्र से भरपूर वोट मिले थे | दूसरी बार वह हार गये थे | अब तीसरी बार के चुनाव में जीत गये थे और मौका था एक कमरे के उद्घाटन का | यद्यपि यह कमरा पिछली सरकार न...
 पोस्ट लेवल : अशोक दर्द लघुकथा
Roshan Jaswal
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Arun Dogra Reetuगरीब थी ,बेचारी रोज शहर में दिहाड़ी कमाने जाती, शाम ढलते ही वापस घर आ जाती थी । एक दिन उसकी बस छूट गई । बस अड्डे पर अकेली खडी थी । तभी एक दम तेज गति से एक कार रूकी,एक दादा टाईप लड़का उसके पास आया, बोला कहां जाना है, जी रामनगर !चलो कार मे छोड़ दें ।...
shashi purwar
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दरवाजे पर हुई आवाज से सुलोचना बाहर आई , एक लड़का था २५ साल का छोटी सी गठरी लिए हुए ,"मम्मी जी,  सूट  के कपडे है ले लीजिये , कम दाम में ,"" अच्छा  लाओ दिखाओ ""यह देखिये सिर्फ 5 ही सफारी के  सेट है , नामी कम्पनी है , बाहर दुकानों पर तो बहुत महंगे...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
Roshan Jaswal
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JAGDISH BALI गुज़िश्ता चंद रोज किसी रिश्तेदार की शादी में शरीक होने जाना हुआ ! एक रात गुज़ारने के वास्ते किसी के घर जाना हुआ ! उस श्क्स का तारीक सा मकान था, परिवार खासा बडा है, बामुशिक्ल गुज़ारा होता होगा ! जब सवेरे चलने को हुए तो उस शक्स की बिवी ने मेरी बेगम...
 पोस्ट लेवल : जगदीश बाली लघुकथा
Sandhya Sharma
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चिड़ियों की चहचहाहट होते ही नींद से उठकर छुई खदान जाना और शाम ढले वापस आकर छुई-मिट्टी के एकसार ढ़ेले तैयार करके सुखाने के लिए रखना. यही दिनचर्या है उसकी. गर्मियों में काम दुगुना बढ़ जाता है, इन दिनों में और अधिक परिश्रम करके छुई इकठ्ठा करती है बरसात के लिए. चाहे को...
shashi purwar
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       चुभन - एक सत्य कथा        मनोज  और  डिंपल  दोनों उच्चशिक्षित थे.  दोनों के मन में  समाज के लिए कुछ करने का जज्बा था. मनोज विधि सेवा अधिकारी थे.  धनी व्यक्तिव के स्वामी, थोड़े अंतर्मुखी,...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
Roshan Jaswal
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उस दिन बस में भीड़ थी। अपेक्षाकृत ज्‍यादा भीड़। घर पहुंचने के लिए उसी बस में यात्रा करना जरूरी भी था। बस के भीतर गाना गाते शोर मचाते कुछ उदण्‍ड छात्रों को देख कर मुझे गुस्‍सा तो आया परन्‍तु चुप्‍पी के सिवा और क्‍या किया जा सकता था। कुछ दूर चलने के बाद बस के ब्...
 पोस्ट लेवल : साहित्‍य लघुकथा
kumarendra singh sengar
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  मात्र दस वर्ष की उम्र में मछली की तरह तैरते हुए उसने जैसे ही अंतिम बिन्दु को छुआ वैसे ही वह तैराकी का रिकॉर्ड बना चुकी थी। स्वीमिंग पूल से बाहर आते ही उसको साथियों ने, परिचितों ने, मीडियाकर्मियों ने घेर लिया। सभी उसे बधाई देने में लगे थे। उसके चेहरे पर अपार...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
shashi purwar
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1 -- लघुकथा ---                        ख्वाब  रोज छोटू को सामने वाली दूकान पर काम करते हुए देखती थी , रोज ऑफिस में चाय देने आता था , हँसता , बोलता  पर आँखों में कुछ  ख्वाब से तैरते थे...
 पोस्ट लेवल : आलेख लघुकथा