ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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उसने चूल्हे में कुछ सूखी लकड़ियाँ डालकर उनमें आग लगा दी और चूल्हे पर बर्तन चढ़ाकर उसमें पानी डाल दिया। बच्चे अभी भी भूख से रो रहे थे। छोटी को उसने उठाकर अपनी सूखी पड़ी छाती से चिपका लिया। बच्ची सूख चुके स्तनों से दूध निकालने का जतन करने लगी और उससे थोड़ा बड़ा लड़का अभी भ...
 पोस्ट लेवल : साहित्य लघुकथा
kumarendra singh sengar
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तब - लड़का लड़की बाजार में पहजी बार मिले। एक झलक में लड़का लड़की का दीवाना हो गया। उसने आकर लड़की से कुछ पूछा। चुलबुली लड़की ने शोख अंदाज में हँसी-ठिठोली में हर सवाल का जवाब दिया। लड़की की कलात्मक चुनरी के बारे में पूछने पर लड़के को पता लगा कि लड़की की सगाई हो गई है। लड़की क...
 पोस्ट लेवल : साहित्य लघुकथा
shivraj gujar
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कई दिनों से कुछ नहीं लिख पाया इसलिए अपनी एक पुराणी लघुकथा पोस्ट कर रहा हूँ. कई साथी इसे पढ़ चुके होंगे, लेकिन यह उन्हें भी नया सा अनुभव देगी, क्योंकि यह रोज मर्रा की जिंदगी से जुडी हुयी है.गोद मैं बच्चा लिए व हाथ मैं झोला लटकाए एक ग्रामीण महिला बस मैं चडी, सीट खाली...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
kumarendra singh sengar
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आलीशान बंगले के विशाल नक्काशीदार दरवाजे के सामने एक छोटा बालक लगातार कुछ मिलने की गुहार लगा रहा था। 'शायद आज चौकीदार छुट्टी पर था नहीं तो उसने अभी तक भगा दिया होता' ऐसा सोचते हुए बच्चे ने फ़िर जोर की आवाज़ लगाई। बरामदे में बंधे दोनोविदेशी 'डोगी' भौंक-भौंक कर उस बाल...
 पोस्ट लेवल : साहित्य लघुकथा
kumarendra singh sengar
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माँ अपने दोनों बच्चों का लगातार भूख से रोना नहीं देख सकी। एक को उठा कर अपने सूख चुके स्तन से लगा लिया, किंतु हड्डियों से चिपक चुके माँ के मांस से ममत्व की धार न बह सकी, क्षुधा शांत न हो सकी। भूख की व्याकुलता से परेशान बच्चे रोते ही रहे। भूखे बच्चों को भोजन देने में...
 पोस्ट लेवल : साहित्य लघुकथा