ब्लॉगसेतु

shashi purwar
164
       लघुकथा --   पतन      भोपाल जाने के लिए बस जल्दी पकड़ी और  आगे की सीट पर सामान रखा था कि  किसी के जोर जोर से  रोने की आवाज आई, मैंने देखा  एक भद्र महिला छाती पीट -पीट  क...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
संतोष त्रिवेदी
192
भारतनगर में सुख-शांति का माहौल था|काफ़ी दिनों से ख़बरें फीकी-फीकी सी आ रही थीं|लोग अपने काम-काज में इतने व्यस्त और मस्त थे कि नगर में हो-हल्ला बिलकुल थम सा गया था|राम लाल और नूर मुहम्मद आपस में गहरे मित्र थे|भारतनगर के भाग्य का फैसला भी इन्हीं के हाथ में था.दोनों अपन...
 पोस्ट लेवल : राजनीति शांति लघुकथा
अविनाश वाचस्पति
272
पिता मरणासन्‍न नहीं थे परंतु गंभीर रोग से पीडि़त थे। स्‍वस्‍थ होने की उम्‍मीद 75 और 25 थी। 75 चिकित्‍सकों की राय में और 25 निजी परिवार जनों की। पुत्र रोजाना कमाकर पेट भरने वाला लेकिन पिता के होते बिल्‍कुल निश्चिंत। विवाह हो चुका था। खुश या मस्‍त था सिर्फ अपने में।...
 पोस्ट लेवल : पुत्र लघुकथा पिता एपल
Deen Dayal Singh
237
साढ़े छह साल की उम्र में होटल में काठ की टेबल पर पोछा लगाने के काम से अपना कैरियर शरू किया. कुछ समय बाद ग्राहकों के गिलास पकड़ने लगा, फिर उनके आगे सलीके से प्लेट भी रखने लगा. शुरू में उसे थोड़े सिक्के मिलते थे बाद में कागज के नोट मिलने लगा. उसका मालिक उसपर एतबार ज...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
Deen Dayal Singh
237
तीनो बच्चे भूख से बेचैन होकर रोते-रोते सो गए थे. उनकी माँ माथा पकडे बैठी थी. तभी उनका बाप झोपड़ें में दाखिल हुआ.पति को आया देखकर वह बोली ,"निखट्टू, आज फिर खाली हाथ आ गया" और उसने खाली पतीली घुस्से से उसकी तरफ उछाल दी.यह उसी समय की बात है जब मुखेश अंबानी ने अपनी पत्...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
Roshan Jaswal
166
पहाड़ में गांव। गांव में एक किनारे पर बसा गरीब घर। घर में दो विधवाएं - सास और बहू। आगे बहू के तीन बच्चे और थोड़ा-सा खेत। आय का साधन -- विधवा पेंशन और गोड (गोशाला) में बंधी भैसों के दूध की बिक्री। सौभाग्य से इन दिनों दोनों भैसों में दूध था। बच्चों के लिए थोड़ा-सा दू...
Roshan Jaswal
166
वैसे तो रिश्वत  लेना और देना हमेशा चर्चा का विषय  रहता है। एक कांड की चर्चा कुछ दिनों तक होती है, उसके बाद कोई नया कांड सामने आ जाता है तो उसकी चर्चा आरंभ हो जाती है। पुराना कांड हासिये पर चला जाता है। यों भी इनसान के दिमाग का आकार इतना छोटा है कि उसमें स...
kumarendra singh sengar
456
रास्ते पर भागमभाग मची हुई थी। सभी लोग एक प्रकार की हड़बड़ी सी दिखाते हुए एक ही दिशा में भागे चले जा रहे थे। यह समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक ऐसा क्या हो गया है कि बाजार में इस तरह की अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। दो-एक को रोक कर पूछने की कोशिश की पर कोई न...
 पोस्ट लेवल : साहित्य लघुकथा
kumarendra singh sengar
456
रास्ते पर भागमभाग मची हुई थी। सभी लोग एक प्रकार की हड़बड़ी सी दिखाते हुए एक ही दिशा में भागे चले जा रहे थे। यह समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक ऐसा क्या हो गया है कि बाजार में इस तरह की अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। दो-एक को रोक कर पूछने की कोशिश की पर कोई...
 पोस्ट लेवल : साहित्य लघुकथा
kumarendra singh sengar
456
मां परेशान थी क्योंकि उसके सामने अपने बेटे को पालने का संकट था। पति था नहीं, स्वयं अकेली और साथ में नन्हीं सी जान। किसी तरह परेशानियां सहकर, दुःख उठाकर अपने बेटे को पाला-पोसा। मां अब भी दुःखी थी, परेशान थी क्योंकि अब वो अपने बेटे की पढ़ाई तथा रोजगार को ले...
 पोस्ट लेवल : साहित्य लघुकथा