ब्लॉगसेतु

ऋता शेखर 'मधु'
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भीड़-निर्माता “रोहित! इधर आओ, ये देखो, आसमान में अचानक इतने सारे पक्षी उड़ने लगे| सब कितने परेशान दिख रहे न| लगता है किसी ने इनका ठिकाना ही उजाड़ दिया हो| और ये आवाज कैसी आ रही, सुनो तो,” पत्नी प्रिया ने रोहित को बालकनी में बुलाकर कहा| “अरे , ये तो पेड़ पर पेड़ काट...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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             एक शायरा जो हसीन थी, ज़हीन थी; टीवी पर ग़ज़ल कहरही थी। अपनी चमकीली काली ज़ुल्फ़ों को उसने क़रीने से वाम-पक्ष में आगे फैलाया था। घनी केश-राशि बाईं आँख का कुछ हिस्सा बार-बार ढक रही थी। कभी दाएँ, कभी बाएँ हाथ से लटों को कान तक...
kumarendra singh sengar
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खाना खाने के बाद वे दोनों टैरेस पर आकर खड़े हो गए. अपने-अपने एहसासों को अपने अन्दर महसूस करते हुए दोनों ही ख़ामोशी से बाहर चमकती लाइट्स को, काले आसमान को, उनमें टिमटिमाते तारों को देखे जा रहे थे. उनकी ख़ामोशी के साथ चलती प्यार भरी लहर में घड़ी ने अवरोध पैदा किया. उसने...
दिनेशराय द्विवेदी
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मेरा मुवक्किल जसबीर सिंह अपने ऑटो में स्टेशन से सवारी ले कर अदालत तक आया था। अपने मुकदमे की तारीख पता करने के लिए मेरे पास आ गया। उसका फैक्ट्री से नौकरी से निकाले जाने का मुकदमा मैं लड़ रहा था। जब वो आया तब मैं टाइपिस्ट के पास बैठ कर डिक्टेशन दे रहा था। मुझे व्यस्त...
 पोस्ट लेवल : नाम short short story Name लघुकथा
kumarendra singh sengar
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मोबाइल को मेज पर टिका कर वह कुर्सी पर पसर गया. ‘कभी अपने घर को देखते हैं’ की तर्ज़ पर उसने एक नजर ड्राइंग रूम कम स्टडी रूम पर दौड़ाई. अस्तव्यस्त तो नहीं कहा जायेगा मगर करीने से लगा भी नहीं कहा जा सकता. पढ़ने के अलावा भी तमाम शौक के उसी कमरे में अपना आकार लेने के कारण...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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            प्रभात अच्छे अंकों से पाँचवीं कक्षा में उत्तीर्ण हुआ। माँ अँग्रेज़ी माध्यम के निजी विद्यालय में आगे की पढ़ाई पर ज़ोर डालते हुए बोली-"अब मेरा बिटवा और अधिक मन लगाकर पढ़ेगा। पढ़-लिखकर गुरूजी बनेगा।""लेकिन अँग्रेज़ी माध्यम...
राजीव तनेजा
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"तंग आ गए यार खाली बैठे बैठे। तू बात कर ना शायद कहीं कोई ऑनलाइन काम ही मिल जाए। लॉक डाउन की वजह से यहाँ बाहर तो सब का सब ठप्प पड़ा है।""हाँ!...यार...खाली बैठे बैठे तो रोटियों तक के लाले पड़ने को हो रहे हैं।""तू बात कर ना कहीं। तेरी तो इतनी जान पहचान है।""हम्म....बात...
राजीव तनेजा
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क्या करें यार...यहाँ इस स्साले  लॉक डाउन में फँस कर तो बहुत बुरा हाल हो गया है। पता नहीं कब छुटकारा मिलेगा। इससे अच्छा तो घर ही चले जाते।" नरेश बड़बड़ाया।"अरे!...क्या खाक घर चले जाते? कोई जाने देता तब ना। सुना नहीं तूने कि बाडर पर ही रोक के रख रहे हैं सब...
kumarendra singh sengar
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सुबह के इंतजार में रात जागते-सोते काटी. सुबह होने के बाद इंतजार उसकी खबर का. थोड़ी-थोड़ी देर में मोबाइल को देखता कहीं वह घंटी सुन न पाया हो. कहीं फोन के बजाय मैसेज ही न किया हो. कभी सोचता कि वह खुद ही फोन करके जानकारी कर ले फिर कुछ सोच कर अपने को रोक लेता. व्यग्रता क...
 पोस्ट लेवल : कहानी लघुकथा
Roli Dixit
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घण्टी बजते ही मैंने अख़बार किनारे रखकर दरवाज़ा खोला."अरे माँ तुम, पहले बता देती तो मैं स्टेशन पर लेने आ जाता" पैर छूकर उनका सामान ले लिया."तुम परेशान थे तो हम आ गए. अग़र पहले से बता देते तो तेरी ये ख़ुशी कहाँ दिखती""ये इतना क्या सामान लाई हो?" मैंने कौतूहलवश निकालना शु...
 पोस्ट लेवल : कहानी मां लघुकथा