ब्लॉगसेतु

ऋता शेखर 'मधु'
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"अस्तित्व"दिल की धड़कन बन्द होती सी महसूस हो रही थी। मैंने झटपट मशीन निकाली और कलाई पर लगाया। नब्ज रेट वाकई कम था। "ओह, क्या तुम मुझे कुछ दिनों की मोहलत दे सकती हो प्रिय", मैंने डूबते स्वर में उसका हाथ पकड़ते हुए कहा।"तुम्हारे पास समय की कमी नहीं थी। पर अब ऐसा क्या ह...
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रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : लघुकथा लघु कथा
Meena Bhardwaj
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अपना वजूद भी इस दुनिया का एक हिस्सा है उस लम्हे को महसूस करने की खुशी , आसमान को आंचल से बाँध लेनेका  हौंसला , आँखों में झिलमिल - झिलमिलाते  सपने और आकंठ हर्ष आपूरित आवाज़ -              &nb...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
रविशंकर श्रीवास्तव
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रविशंकर श्रीवास्तव
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रविशंकर श्रीवास्तव
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रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : लघुकथा
ज्योति  देहलीवाल
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शिल्पा का दस वर्षिय बेटा सुहास आंगण में खेल रहा था। उसने बेटे से कहा, ''तुम आंगण में खेल रहे हो...गैया आई तो ख्याल रख कर मुझे आवाज़ लगा देना...मुझे गैया को रोटी देनी हैं।'' इतना कह कर वो अपने काम करने लग गई। थोड़ी देर बाद ही सुहास की आवाज़ आई, ''मम्मी, गैया आ ग...
Rajeev Upadhyay
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टीवी खोला ही था कि धमाका हुआ और धमाका देखकर मेरे बालमन का मयूर नाच उठा। बालमन का मयूर था तो नौसिखिया नर्तक होना तो लाजमी ही था। परन्तु नौसिखिए नर्तक के साथ सबसे बड़ी समस्या ये होती है कि उसे हर काम में ‘साथी हाथ बढ़ाना’ वाले भाव में एक साथी की आवश्यकता महसूस होती है।...
ऋता शेखर 'मधु'
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धुँधली आँखचारो तरफ ॐ कृष्णाय नमः की भक्तिमय धूम मची हुई थी। देवलोक में बैठे कृष्ण इस कोशिश में लगे थे कि किसी की पुकार अनसुनी न रह जाये। कृष्ण के बगल में बैठे सुदामा मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।" रहस्यमयी मुस्कान तो हमारे अधरों पर विराजमान रहती है मित्र, आज आपने क्यों...
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