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Hari Mohan Gupta
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 लघु कथा        सास बहू की रोज रोज की चिकचिक से तंग आ कर राकेश ने माँ को वृद्धाश्रम में भरती करा दिया, भरपूर पैसे उस आश्रम को देता कि माँ को किसी प्रकार की परेशानी न हो, लेकिन माँ का मन उस आश्रम में नहीं लगता था | आज उसका पुराना न...
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रविशंकर श्रीवास्तव
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Hari Mohan Gupta
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लघु कथा राकेश मल्टी नेशनल कम्पनी में एक्ज्युकेटिव हेड था, बड़ी कम्पनियों में काम का बोझ तो अधिक होता है, घर पर 8 साल के अपने लाडले अंकुर को कम ही समय दे पाता था | वह कई बार चिड़िया घर दिखाने के लिये कह चुका था, इस रविवार को उसने फिर कहा तो राकेश उसका आग्रह न टाल सका,...
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रविशंकर श्रीवास्तव
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रविशंकर श्रीवास्तव
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रविशंकर श्रीवास्तव
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रविशंकर श्रीवास्तव
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Hari Mohan Gupta
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  लघु कथा ऐ.के.जोहरी को इनकमटेक्स आफिसमें प्रेक्टिस करते हुये अभी एक वर्ष ही हुआ था,7,8 फाइलें थी उसी में सन्तोष था | ऐक दिन सुनने को मिला कि इन्कमटेक्स कमिश्नर की तबियत बहुत खराब है, ऐक सप्ताह से अधिक हो गया है बुखार ही नहीं उतर रहा है, नगर के बड़े बड़े वकील एं...
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sanjiv verma salil
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लघु कथाविजय दिवस*करगिल विजय की वर्षगांठ को विजय दिवस के रूप में मनाये जाने की खबर पाकर एक मित्र बोले-'क्या चोर या बदमाश को घर से निकाल बाहर करना विजय कहलाता है?'''पड़ोसियों को अपने घर से निकल बाहर करने के लिए देश-हितों की उपेक्षा, सीमाओं की अनदेखी, राजनैतिक मतभेदों...
sanjiv verma salil
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 लघु कथा राष्ट्रीय एकता संजीव *'माँ! दो भारतीयों के तीन मत क्यों होते हैं?'''क्यों क्या हुआ?'''संसद और विधायिकाओं में जितने जन प्रतिनिधि होते हैं उनसे अधिक मत व्यक्त किये जाते हैं.'''बेटा! वे अलग-अलग दलों के होते हैं न.'''अच्छा, फिर दूरदर्शनी पर...