ब्लॉगसेतु

shivraj gujar
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शिवराज गूजर हे भगवान कौन से जन्मों के पापों की सजा दे रहा है मुझे ? यह गंदगी भी मेरी छाती पर ही छोड़नी थी। पूरा घर गंदगी से भर दिया इस बुढ़िया ने। बीमार सास को गालियां देते हुए नाक बंद कर घर में घुसती मिसेज शर्मा नौकरानी पर चिल्लाई ।कांताबाई ! अरी कहा...
Sanjay  Grover
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लघुकथावह हमारे घरों, दुकानों, दिलों और दिमाग़ों में छुपी बैठी थी और हम उसे जंतर-मंतर और रामलीला ग्राउंड में ढूंढ रहे थे।-संजय ग्रोवर05-02-2017
Vikram Pratap Singh Sachan
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शुक्ला जी रोज की तरह दफ्तर से निकल कर सीधे पप्पू पनवाड़ी की दुकान पर आ टिके। पप्पू ने शुक्ला जी को देखते ही पान बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। पप्पू पान में कत्था लगा ही रहा था उसका ध्यान शुक्ला जी की खास वेशभूषा ने आकर्षित किया। थोड़ी देर चुप रहने के बाद पप्...
 पोस्ट लेवल : लघु कहानी कहानी
Vikram Pratap Singh Sachan
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तालाब के आसपास आज मजमा लगा हुआ था। गाँव के उत्साही और रसूखदार घरो के बच्चे जमा थे और कयास लगा रहे थे। पास ही खड़ा जगदीश हवा में हाथ पैर चला रहा था। गुल्ली को डण्डे से किस तरह मरेगा इसी अभ्यास में रत था।  इतने में छोटे चौधरी की आवाज ने सन्नाटे को चीरा। चल य...
 पोस्ट लेवल : लघु कहानी