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मुकेश कुमार
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"लाल फ्राक वाली लड़की" ( पुस्तक)लेखक- मुकेश कुमार सिन्हाहां ! यही नाम है प्रेम के हर उस एहसास का जिसे कहीं न कहीं अपने उम्र के दौर में कुछ पल के लिए ही सही पर जीते हम सभी हैंजी हाँ ! कुछ ऐसी ही है लाल "फ्राक वाली लड़की" नादान मन की भोली ख्वाइश कच्चे पक्के जज्बातों की...
 पोस्ट लेवल : समीक्षा lfwl बबली लप्रेक
Bharat Tiwari
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लप्रेक – है क्या यह? पढ़िए मुकेश कुमार सिन्हा की तीन लघु प्रेम कहानियाँउम्मीद शायद सतरंगी या लाल फ्रॉक के साथ, वैसे रंग के ही फीते से गुंथी लड़की की मुस्कुराहटों को देख कर मर मिटना या इंद्रधनुषी खुशियों की थी, जो स्मृतियों में एकदम से कुलबुलाई।मॉनसूनमेघों को भी...
मुकेश कुमार
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स्मृतियों के गुल्लक मेंसिक्कों की खनक और टनटनाती मृदुल आवाजों मेंफिर से दिखी वोलाल फ्रॉक वाली लड़कीशायद उसके पायल की रुनझुन बता रही थी दूर तलककि नखरैल और अभिमानी लड़कीचलाएगी हुकुमस्नेहसिक्त टिमटिमाती नजरों के प्रभाव में !चन्द सिक्के, कुछ चूड़ियाँ और कुछ चकमक पत्थ...
मुकेश कुमार
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लेखक : मुकेश कुमार सिन्हाश्रेणी : लप्रेक (लघु प्रेम कथा) संग्रहप्रकाशक : बोधि प्रकाशन, जयपुर (राजस्थान)कीमत : ₹100किताब के बारे में कुछ कहने से पहले ‘दो शब्द’ इस किताब के लेखक और मेरे मित्र ‘मुकेश कुमार सिन्हा’ के बारे में कहना चाहती हूँ जिन्हें माँ शारदे से कलम का...
Bharat Tiwari
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तकिये में एक दिल होता है— गौरव सक्सेना "अदीब"सो गए तुम"नहीं तो जाग रहा हूँ, क्यों?”क्यों जाग रहे हो वैसे।"सोच रहा हूँ”क्या सोच रहे हो?"यही की लोग तकिये पे नाम क्यों लिखते हैं?”अच्छा जी ये ख्याल कहाँ से आया है आपको?"हम्म!! कल तुम बहुत याद आयीं अमृता।"तो?"तो क्या सो...
मुकेश कुमार
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संसद मार्ग एटीएम के सामने पंक्तिबद्ध लड़का जो करीब 300 लोगो के बाद खड़ा था, और उसके बाद फिर करीबन 200 लोग खड़े थे ! बेसब्री से बैंक के दरवाजे खुलने का सबों को इन्तजार था ! कोई गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी वाले चाय बाँट रहे थे, सभी लाइन में खड़े पकते लोगो के लिए !! :oतभी उन...
मुकेश कुमार
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लघु प्रेम कथा----------कॉलेज के उसी खास दरख़्त के नीचे लीजर पीरियड में समय काटते हुए लड़के ने अपने दिमाग में प्रेम व विज्ञान के घालमेल के साथ बोला - ओये ! अच्छा ये बताओ दो हाइड्रोजन एटम एक ऑक्सीजन के एटम के साथ क्रिया-प्रतिक्रिया कर H2O यानि जल में परिवर्तित हो जात...
Manish K Singh
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वह फ़ुदकती हुयी चली आ रही थी ! जैसे कोई चार-पांच साल की छोटी बच्ची हो ! उसका व्यक्तित्व ही इतना आकर्षक और जिंदादिल था कि किसी बैरागी को भी सम्मोहित कर ले !और वह इतनी पाक थी की कोई भी उसे देखकर पाकीज़गी महसूस करने लगे !आज दोनों लगभग चार साल बाद मिल रहे थे ! उसकी आंखे...
 पोस्ट लेवल : लप्रेक
Manish K Singh
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वह शहर छोड़ के जा रही थी ! और शायद उससे उसकी यह आख़िरी मुलाकात थी ! चाय का कप उसने उसके हाथों में दिया ! और अपना कप अपने सामने टेबल पर रखकर उसे निहारने लगा ! और उससे पूछा – कैसी लगी तुम्हे चाय ?वह एकदम हौले से गर्दन हिलाकर बोली – मुझे तो अच्छी लगी ! तुम बताओं ! तुम्ह...
 पोस्ट लेवल : pic credit- pinrest.com लप्रेक
Manish K Singh
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कुछ ही दिन पहले वह दोनों मिले थे ! जैसे बहुत से लोग मिल जाते है जिन्दगी में ! पर इस बार उन दोनों को लगा मानों तपती धरती को सदियों बाद बारिश मिल गयी है ! एक अजीब सा स्नेह , अपनापन बन गया था ! जैसे – जैसे दिन बीतते गए उनके विश्वास ने उन दोनों में अलग ही निख़ार भर दिया...
 पोस्ट लेवल : लप्रेक