ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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 कुछ हर्षाते लम्हे अनायास ही मौन में मैंने धँसाये  थे  आँखों  के पानी से भिगो कठोर किया उन्हें  साँसों की पतली परत में छिपा ख़ामोश किया था जिन्हें फिर भी  हार न मानी उन्हो...
संजय भास्कर
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 ( चित्र गूगल से साभार  ) ज़िन्दगी से लम्हे चुरा बटुए मे रखता रहा !  फुरसत से खरचूंगा बस यही सोचता रहा !! उधड़ती रही जेब करता रहा तुरपाई ! फिसलती रही खुशियाँ करता रहा भरपाई !! इक दिन फुरसत पायी सोचा खुद को आज रिझाऊं बरसों से जो जोड़े वो...
सुमन कपूर
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खाली लम्हों को तेरे ख़यालों से जो सजाया हमने जाम-ए-सेहरा सा दिन इश्क-ए-समंदर में ढल गया !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : ख़याल वो लम्हें....
Saliha Mansoori
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आज फिर तन्हा हूँ मैं तुमसे बिछड़कर लेकिन कुछ पल जैसे आज भी जिन्दा हैं कुछ लम्हें जैसे आज भी ठहरे हैं .... - सालिहा मंसूरी14.02.16 
Abhishek Kumar
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जब से सुना था इस फिल्म के बारे में तब से ही काफी ज्यादा  उत्सुकता थी. राकेश ओमप्रकाश मेहरा मेरे सबसे प्रिय डायरेक्टर में से हैं. उनकी तीनों फ़िल्में मुझे बेहद पसंद आई थी, और गुलज़ार साहब तो हर दिल अजीज हैं. उनके लिए तो जितना कहूँ उतना कम लगता है. जब से सुना था क...
राजीव कुमार झा
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जब कभी सपनों में वो बुलाता है मुझेबीते लम्हों की दास्तां सुनाता है मुझे इंसानी जूनून का एक पैगाम लिए बंद दरवाजों के पार दिखाता है मुझे नफरत,द्वेष,ईर्ष्या की कोई झलक नहीं ये कौन सी जहां में ले जाता है मुझे मेरे इख्तयार में क्या-क्या नहीं होता बिगड़े मुकद्दर की याद दि...
Abhishek Kumar
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हज़ारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावार पैदा... सच ही तो है न...जब तक कोई दीदावार न हो...नरगिस के नूर का मोल ही क्या...? अक्सर ये दुनिया अपने अन्धेरों से घबरा कर किसी दिये को तलाशती है, पर अगर किस्मत अच्छी हो तो खुद...
Abhishek Kumar
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आज की ये ख़ास पोस्ट है, गुलज़ार साहब के जन्मदिन के मौके पर. सोचा तो था आज कुछ अपनी बात कहूँगा, कुछ गुलज़ार साहब के लिए लिखूंगा, लेकिन मौका ही नहीं मिला आज. फेसबुक पर एक ग्रुप है गुलज़ार साहब के फैन्स का ग्रुप (जी-मित्र के नाम से), वहीँ से आज सुबह एक बेहतरीन लिंक हाथ लग...
सुमन कपूर
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तब हल्का हल्का दर्द था छोटी छोटी ख़्वाहिशें थी ....गहरा गहरा रिश्ता था महकी महकी आशाएं थी ..... भरा भरा दरिया था प्यासी प्यासी बारिशें थी .........अब अलग अलग रास्ता है भूली भूली यादें हैं ......
Manav Mehta
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जिंदगी दर्द में दफ़न हो गई इक रात,उदासी बिखर गई चाँदनी में घुल कर....!!चाँद ने उगले दो आँसू,ज़र्द साँसें भी फड़फड़ा कर बुझ गयी......!!इस दफा चिता पर मेरे-मेरी रूह भी जल उठेगी.........!!मानव मेहता 'मन'