ब्लॉगसेतु

girish billore
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     भारतीय भाषाई साहित्य अंतरजाल पर जिस तरह विस्तार पा रहा है, उसकी कल्पना हमने हिंदी चिट्ठाकारी के प्रारंभिक दौर में कर ली थी। परंतु बहुत सारी लोगों को हमारा काम बेवकूफी से बढ़कर कुछ नहीं लग रहा था।    कुछ लोग हिंदी चिट्ठाकारी क...
अनंत विजय
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भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से संबद्ध एक स्वयायत्त संस्था है ललित कला अकादमी। इस संस्था का शुभारंभ 5 अगस्त 1954 को उस समय के शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आजाद ने किया था। इसका उद्देश्य चित्रकला, मूर्तिकला आदि के क्षेत्र में अध्ययन और शोध को बढ़ावा देना है। इसके अलाव...
sanjiv verma salil
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 दोहांजलि*जयललिता-लालित्य को भूल सकेगा कौन?शून्य एक उपजा, भरे कौन? छा गया मौन.* जननेत्री थीं लोकप्रिय, अभिनेत्री संपूर्ण.जयललिता सौन्दर्य की मूर्ति, शिष्ट-शालीन.*दीन जनों को राहतें,दीं जन-धन से खूब समर्थकी जयकार मेंहँसीं हमेशा डूब *भारी रहीं विपक्ष पर, समर्थक...
 पोस्ट लेवल : दोहांजलि जयललिता
sanjiv verma salil
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मालवी हाइकुललिता रावल*बिलपत्तरठूँठ सावन मायभोला रिझाय*इंद्रधनुषछटा बिखेरीरियोअकास माय*पँखेरू उड्याबसेरा पे लौटीर्याअकास गूंज्यो*पूरबी हवापच्छम आड़ी लइहिलोर लइ*रमा-झमा सेसावन सेरो लायोभादो ग़ैरायो*लीलो आकाससफेद हुइ गयाबूड़ो हुइ ग्यो*जेठ को घामतपावे आखो गामअसाड़ पाछे*htt...
sanjiv verma salil
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मालवी हाइकुललिता रावल*बिलपत्तरठूँठ सावन मायभोला रिझाय*इंद्रधनुषछटा बिखेरीरियोअकास माय*पँखेरू उड्याबसेरा पे लौटीर्याअकास गूंज्यो*पूरबी हवापच्छम आड़ी लइहिलोर लइ*रमा-झमा सेसावन सेरो लायोभादो ग़ैरायो*लीलो आकाससफेद हुइ गयाबूड़ो हुइ ग्यो*जेठ को घामतपावे आखो गामअसाड़ पाछ...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : आलेख ललित निबंध
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--उत्तरायणी पर्व के, भिन्न-भिन्न हैं नाम।आया लेकर हर्ष को, उत्सव ललित-ललाम।।--गंगा में डुबकी लगा, पावन करो शरीर।नदियों में बहता यहाँ, पावन निर्मल नीर।।--जीवन में उल्लास के, बहुत निराले ढंग।बलखाती आकाश में, उड़ती हुई पतंग।।--सूर्य रश्मियाँ आ गयीं, ख...
अनीता सैनी
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सर्द हवाएँ चली कुबेला में,   ओस से आँचल सजाने को,   ललिता-सी लहरायी निशा संग, शीतल चाँदनी छिटकाने को |समेटे थी यौवन चिरकाल से,  खिला कुँज शेफालिका-सा,   झूल रही झूला नील गगन में, ख़ुशनुमा फुहार बरसाने को |प...
अनंत विजय
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हाल ही में एक सेमिनार में जाने का अवसर मिला जहां समाजशास्त्रियों को सुना। इस सेमिनार में संस्थाओं के बनाने और उसको सुचारू रूप से चलाने पर बात हो रही थी। सभी वक्ता अपनी-अपनी बात तर्कों के साथ रख रहे थे, ज्यादातर वक्ता नई संस्थाओं को बनाने के लिए तर्क दे रहे थे, कुछ...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कहानी ललित निबंध