ब्लॉगसेतु

ललित शर्मा
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नया  मौसम  आया  है  जरा  सा तुम संवर जाओजरा सा हम बदल जाएँ, जरा सा तुम बदल जाओजमी  ने  ओढ़  ली  है  एक  नयी  चुनर  वासंती  गुजारिश है के  अब  जरा  सा  तुम  महक  जाओ...
ललित शर्मा
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मैं जंगली हूँ,सीधा सा,भोला सा सबसे डरने वालाअपनी छोटी सी दुनिया में बसने वाला,रहने वालाअपने जंगल को चाहने वालाएक मृग के पीछे चला आयारास्ता भटक गया,पकड़ लिया गया मुझेशहर में घेरकर जंजीरों से बंधा गया मुझेइनमे मेरा अपना कोई नही थासब पीछे जंगल में छुट गयामेरी माँ,मेर...
ललित शर्मा
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प्रभु जी मन में अमन कर दो इस जीवन  में  लगन  भर  दो  राह   ऐसी   दिखाओ  प्रभु,  दुखियों  की  सेवा  होनिर्बल को बल मिल जाये तेरे  प्रेम  की  मेवा  हो हम रहें समीप तुम्हारे...