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ऋता शेखर 'मधु'
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विधा- ललित छंद (सार छंद)... 16-12 पर यति अंत में वाचिक भार 22, कुल चार चरण, दो-दो चरण में तुकांत अनिवार्य है. नेह-सिक्त निर्मल धारा से , मिलती कंचन काया | अम्बर जैसा प्यार पिता का, शीतल माँ का साया || जाने कितने दुख सुख सहकर, तिनका तिनका जोड़े| ऊँची शिक्षा की खातिर...
 पोस्ट लेवल : ललित छंद छंद
ऋता शेखर 'मधु'
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सार/ललित छंद-- 16-12१. टिक टिक करती घड़ियाँ बोलीं, साथ समय के चलनासोने से सो जाते अवसर, मिलता कोई हल नानींद देश की सुखद छाँव में, बतियाते हैं सपनेश्रम का सूरज साथ चले तो, हो जाते हैं अपने२.अँधियारी रातों में पथ पर, दीपक एक जलाएँबन जाए दीपों की माला, ऐसी अलख जगाएँहर...
shashi purwar
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१छन्न पकैया  छन्न पकैया, ऋतु बसंत है आयीफिर कोयल कूके बागों में ,झूम  रही अमराई२  छन्न पकैया छन्न पकैया, उमर हुई है बाली होली खेलें जीजा - साली, बीबी देती गाली ३छन्न पकैया छन्न पकैया ,दिन गर्मी के आयेठंडा मौसम , ठंडा पानी, होली मनवा भाये। ४छन्न पकैया...