ब्लॉगसेतु

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--अब फैशन इस दौड़ में, मानवता लाचार।।नहीं रही शालीनता, वस्त्र गये हैं हार।।--उपवन में कलियाँ करें, जब-जब भी शृंगार।उन्हें रिझाने के लिए, मधुप करें गुंजार।।--कामुकता के मूल में, सुन्दरता के तार।रूप-गन्ध के लोभ में, मधुप करें बेगार।।--रूप-रंग क...
 पोस्ट लेवल : मानवता लाचार दोहे
अनीता सैनी
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 घटनाएँ लम्बी कतार में बुर्क़ा पहने  सांत्वना की  प्रतीक्षा में लाचार बन  खड़ी थीं | देखते ही देखते दूब के नाल-सी बेबस कतार  और बढ़ रही थी |समय का हाल बहुत बुरा था 1920 का था अंतिम पड़ाव&nb...
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--जगह-जगह पर हैं लगीं, लोगों की चौपाल।सियासती रुख देखकर, होता बहुत मलाल।।--सियासती दरवेश अब, नहीं रहे अनुकूल।मजबूरी में भा रहे, नागफनी के फूल।।--फूलों के बदले मिले, जनता को तो शूल।नये ढंग से हो रहे, वादे ऊल-जुलूल।।--राजनीति के आज तो, बदल गये हैं अर्थ।उपयोगी वो बन ग...
 पोस्ट लेवल : दोहे जनमानस लाचार
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )इस वीडियो मेँ भी दो पत्रकारों की रिपोर्टों के जरिए बताया गया है कि प्रदूषण के लिए किसानों का पराली जलाना उत्तरदाई नहीं है और उनको इसे जलाना भी सरकारी का...
अनीता सैनी
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वे मर रहें हैं, अपनी ही लाचारी से, प्रतिदिन लाखों की तादाद में, परन्तु कहीं कोई नामोनिशान नहीं |कुछ मारे भी जाते हैं,  बेबसी के हाथों,  रुतबे की निगाहों से, शब्दभेदी-बाण से, किन्तु कहीं ख़ून के धब्बे नहीं, सभ्यता माँ...
अनीता सैनी
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ख़ामोशी से बातें करता था न जाने  क्यों लाचारी है  किपसीने की बूँद की तरह टपक ही जाती थी अंतरमन में उठता द्वंद्व ललाट पर सलवटें  आँखों में बेलौस बेचैनी छोड़ ही जाती थी दूध में कभी पानी की मात्रा कभी दूध...
कुमार मुकुल
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'राजाजी की कथाएं' कथाकार व अनुवादक एस.भाग्‍यम शर्मा द्वारा भारतीय राजनीति के शिखर पुरूष चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की बाल कथाओं का तमिल से हिंदी में अनुवाद है। इससे पहले राजाजी की अन्‍य बाल कथाओं के उनके अनुवाद पत्रिका प्रकाशन से भी पुस्‍तकाकार 'बालकथाएं' शीर्षक से प्...
सुशील बाकलीवाल
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          लस्सी का ऑर्डर देकर हम सब आराम से बैठकर एक दूसरे की खिंचाई और हंसी-मजाक में लगे ही थे कि एक लगभग 70-75 साल की माताजी कुछ पैसे मांगते हुए मेरे सामने हाथ फैलाकर खड़ी हो गईं....!     &nbsp...
मधुलिका पटेल
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ऊँचा पद बढ़ता रौबकुर्सी का रुतबाअधिनस्तोकी फ़ौजजोड़ते हाथ विनती के घुटता दम मरता स्वाभिमान आस और उम्मीद किस चीज कीपेट की आग बुझाने वाली बरसात रोटी और पैसा बहुत नीचे खड़ा है वो पता नहीं दिखेगा भी की नहीं उसकी विनती और लाचारी वाला कद बहुत ही न्यून है कुर्सी से उसे उम्मीद...
डॉ शिव राज  शर्मा
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इश्क़ में कैसी ये गिरफ़्तारी है जैसे दिल की कोई लाचारी है दूर जाने का मौका है फिर भी हमको क्यों ये जंज़ीर प्यारी है दिल की बात उसे कहने से पहले करनी उस के दिल से यारी है उसे भी थोडा करीब आना चाहिए क्या हर बात बस मेरी जिम्मेदारी है&nb...