ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )इस वीडियो मेँ भी दो पत्रकारों की रिपोर्टों के जरिए बताया गया है कि प्रदूषण के लिए किसानों का पराली जलाना उत्तरदाई नहीं है और उनको इसे जलाना भी सरकारी का...
अनीता सैनी
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वे मर रहें हैं, अपनी ही लाचारी से, प्रतिदिन लाखों की तादाद में, परन्तु कहीं कोई नामोनिशान नहीं |कुछ मारे भी जाते हैं,  बेबसी के हाथों,  रुतबे की निगाहों से, शब्दभेदी-बाण से, किन्तु कहीं ख़ून के धब्बे नहीं, सभ्यता माँ...
अनीता सैनी
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ख़ामोशी से बातें करता था न जाने  क्यों लाचारी है  किपसीने की बूँद की तरह टपक ही जाती थी अंतरमन में उठता द्वंद्व ललाट पर सलवटें  आँखों में बेलौस बेचैनी छोड़ ही जाती थी दूध में कभी पानी की मात्रा कभी दूध...
कुमार मुकुल
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'राजाजी की कथाएं' कथाकार व अनुवादक एस.भाग्‍यम शर्मा द्वारा भारतीय राजनीति के शिखर पुरूष चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की बाल कथाओं का तमिल से हिंदी में अनुवाद है। इससे पहले राजाजी की अन्‍य बाल कथाओं के उनके अनुवाद पत्रिका प्रकाशन से भी पुस्‍तकाकार 'बालकथाएं' शीर्षक से प्...
सुशील बाकलीवाल
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          लस्सी का ऑर्डर देकर हम सब आराम से बैठकर एक दूसरे की खिंचाई और हंसी-मजाक में लगे ही थे कि एक लगभग 70-75 साल की माताजी कुछ पैसे मांगते हुए मेरे सामने हाथ फैलाकर खड़ी हो गईं....!     &nbsp...
मधुलिका पटेल
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ऊँचा पद बढ़ता रौबकुर्सी का रुतबाअधिनस्तोकी फ़ौजजोड़ते हाथ विनती के घुटता दम मरता स्वाभिमान आस और उम्मीद किस चीज कीपेट की आग बुझाने वाली बरसात रोटी और पैसा बहुत नीचे खड़ा है वो पता नहीं दिखेगा भी की नहीं उसकी विनती और लाचारी वाला कद बहुत ही न्यून है कुर्सी से उसे उम्मीद...
डॉ शिव राज  शर्मा
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इश्क़ में कैसी ये गिरफ़्तारी है जैसे दिल की कोई लाचारी है दूर जाने का मौका है फिर भी हमको क्यों ये जंज़ीर प्यारी है दिल की बात उसे कहने से पहले करनी उस के दिल से यारी है उसे भी थोडा करीब आना चाहिए क्या हर बात बस मेरी जिम्मेदारी है&nb...
मधुलिका पटेल
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जिस्म ने अपनी हल - चल खो दी थी  पर आत्मा अब भीजंग लड़ रही थी कानो में पिघल रहा था लाचारी बेबसी और  भयानकता का शोर जिस मोड़ पर देखे थे सुनहरे सपने  मन के अंधेरे कोने में बंद पड़े थे आत्मा ने बहुत कोशिश की इन बेजान सांसो में फिर खुशियाँ भर पाँऊ मन के अंधे...
मधुलिका पटेल
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वृद्धावस्था की तैयारी कर्मों का लेखा जोखाशारीर नहीं दे कहीं धोखासहारे वाले हाथ नहीं हैंअब बच्चों व रिश्तेदारों की बारात नहीं हैअकेली सुबह हैखाली और काली संध्या हैसन्नाटे बन गए कान के बालेलटक-लटक कर शोर करते हैंआराम कुर्सी है हिलने वालीकुर्सी स्थिर है हिल रहा श...
अनंत विजय
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आजादी के तकरीबन दो दशक पहले उन्नीस सौ अट्ठाइस के आसपास चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने लिखा था- जनता की भाषा एक और शासन की भाषा दूसरी होने से जनता संसद तथा विधानसभाओं के सदस्यों पर समुचित नियंत्रण नहीं रख सकेगी, इसलिए उचित यही है कि हम अपनी सुविधा के लोभ में आकर अंग्रेज...