ब्लॉगसेतु

सतीश सक्सेना
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जयकार में उठी कलम,क्या ख़ाक लिखेगीअभिव्यक्ति को वतन में,खतरनाक लिखेगी !अवसाद में निराश कलम , ज्ञान लिखेगी ?मुंह खोल जो कह न सके,चर्वाक लिखेगी ?जिसने किया बरवाद , वे बाहर के नहीं थे !तकलीफ ए क़ौम को भी इत्तिफ़ाक़ लिखेगी !किसने दिया था दर्द, वह बतला न सकेगी !कुछ चाहतें द...
sanjiv verma salil
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रसानंद दे छंद नर्मदा २२ :आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'दोहा, सोरठा, रोला, आल्हा, सार , ताटंक, रूपमाला (मदन), चौपाई , हरिगीतिका, उल्लाला , गीतिका, घनाक्षरी, बरवै, त्रिभंगी तथा सरसी छंदों से साक्षात के पश्चात् अब मिलिए षट्पदिक छप्पय छन्द से.रोला-उल्लाला मिले, बनता छप्पय छ...
ज्योति  देहलीवाल
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लाल मिर्च के भरवां अचार को एक बार बना कर साल भर खा सकते हैं। यह अचार खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगता हैं। जानिए, कम तेल में लाल मिर्च का भरवां अचार बनाने का सिक्रेट तरीका... सामग्री- ingredient for making red chili pickle • लाल मिर्च- 500 ग्राम • मेथ...
S.M. MAsoom
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आज जा पहुंचा वाराणसी के राजघाट स्थित १७७३ ईस्वी में मुग़ल वास्तुशिल्प से बने लाल खान में खूबसूरत मक़बरे पे जो गंगा किनारे खड़ा अपनी गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल बना आज भी खड़ा है |काशी की धरोहर में मौजूद 'लाल खां का रौजा' जिसे महाराजा बनारस ने अपने वीर सेनापति लाल खान की...
Akhilesh Karn
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फिल्म : मेहंदी लगा के रखनागायक : कल्पना, खेसारीलाल यादव (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); ला ला ला ला ला लाबान्ह लीहली प्रीत तोहर ओढ़नी के छोर मेंबान्ह लीहली प्रीत तोहर ओढ़नी के छोर मेंबस गइल बनके कजरा अंखिया के कोर मेंन जाने जादू कैइसन यार...
sanjay krishna
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अपर बाजार के भीड़-भाड़ इलाके में सौ साल से एक पुस्तकालय चुपचाप अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। गोविंद भवन के दूसरे तल्ले पर चल रहे इस पुस्तकालय में कभी रांची के साहित्यकारों का जमघट लगता था। यहीं से कहानी के प्लाट निकलते थे, विचारों की सरिता निकलती थी। पर, अब बेह...
 पोस्ट लेवल : संतुलाल पुस्तकालय
अनंत विजय
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गणतंत्र दिवस पर लाल किला में कवि सम्मेलन की परंपरा बहुत पुरानी रही है, एक जमाने में इस कवि सम्मेलन की दिल्ली के साहित्यप्रमियों को प्रतीक्षा रहती थी और वहां श्रोताओं की संख्या काफी होती थी। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी इस कवि सम्मेलन में वहां जाया करत...
 पोस्ट लेवल : दिनकर लाल किला नेहरू
Rajeev Upadhyay
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संपादक जी,इस सड़ी गर्मी में अपना तो क्‍या अमरीका और ब्रिटेन जैसे बड़े बड़ों का तेल निकल गया, महाराज। बरसात न होने के कारण हमारे अन्‍नमय कोष में महँगाई और चोरबाजारी के पत्‍थर पड़ रहे हैं, हम बड़े चिंताग्रस्‍त और दुखी हैं; पर यदि अपनी उदारता को पसारा देकर सोचें तो हम...
Rajeev Upadhyay
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अपने जमाने से जीवनलाल का अनोखा संबंध था। जमाना उनका दोस्‍त और दुश्‍मन एक साथ था। उनका बड़े से बड़ा निंदक एक जगह पर उनकी प्रशंसा करने के लिए बाध्‍य था और दूसरी ओर उन पर अपनी जान निसार करनेवाला उनका बड़े से बड़ा प्रशंसक किसी ने किसी बात के लिए उनकी निंदा करने से बाज...
 पोस्ट लेवल : अमृतलाल नागर कहानी
विजय राजबली माथुर
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Rajanish Kumar Srivastava #C.A.A.# यानी *अपनो पे सितम गैरों पर करम*जब विभाजन का दंश झेल भारत आजाद हुआ तो बहुत सारे हिन्दू और सिखों ने इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान को छोड़ कर सेकुलर भारत को तरजीह देते हुए भारत आना और भारत का नागरिक बन देश की सेवा करना स्वीकार किय...