ब्लॉगसेतु

सतीश सक्सेना
101
जयकार में उठी कलम,क्या ख़ाक लिखेगीअभिव्यक्ति को वतन में,खतरनाक लिखेगी !अवसाद में निराश कलम , ज्ञान लिखेगी ?मुंह खोल जो कह न सके,चर्वाक लिखेगी ?जिसने किया बरवाद , वे बाहर के नहीं थे !तकलीफ ए क़ौम को भी इत्तिफ़ाक़ लिखेगी !किसने दिया था दर्द, वह बतला न सकेगी !कुछ चाहतें द...
विजय राजबली माथुर
97
Rajanish Kumar Srivastava #C.A.A.# यानी *अपनो पे सितम गैरों पर करम*जब विभाजन का दंश झेल भारत आजाद हुआ तो बहुत सारे हिन्दू और सिखों ने इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान को छोड़ कर सेकुलर भारत को तरजीह देते हुए भारत आना और भारत का नागरिक बन देश की सेवा करना स्वीकार किय...
अनीता सैनी
7
 दायरे में सिकुड़ रही स्वतंत्रता, पनीली कर सकूँ ऐसा नीर कहाँ से लाऊं ? कविता सृजन की आवाज़  है चिरकाल तक जले,  कवि हृदय में वो आग कैसे जलाऊं ? समझा पाऊँ शोषण की परिभाषा,  ऐसा तर्क कहाँ  से लाऊं  ? स्वार्थ के...
सतीश सक्सेना
101
वह दिन भूलीं कृशकाय बदन,अतृप्त भूख से , व्याकुल हो,  आयीं थीं , भूखी, प्यासी सी इक दिन इस द्वारे आकुल हो जिस दिन से तेरे पाँव पड़े  दुर्भाग्य युक्त इस आँगन में !अभिशप्त ह्रदय जाने कैसे ,भावना क्रूर इतनी मन में ,पीताम्बर प...
Sanjay  Grover
400
बचपन से लेकर जवानी तक एक वाक्य से अकसर सामना होता रहा-‘स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है’। लेकिन स्वस्थ शरीर वालों की बातें और क्रिया-कलाप देखकर मन यह मानने को कभी राज़ी न हुआ। उस वक्त चूंकि स्वास्थ्य ज़रा-ज़रा सी बात पर ख़राब हो जाया करता था सो यह भी ल...
सतीश सक्सेना
101
मैंने आज तक किसी को बेटी नहीं कहा क्योंकि मेरे पास अपने पापा को बेहद प्यार करने वाली बेटी पहले से ही मौजूद है, मैंने किसी को बहिन नहीं बनाया क्योँकि मेरी हर वक्त चिंता करने वाली दो बड़ी बहिनें पहले से ही हैं , बहनों और बेटी को जितना प्यार और समय मुझे देना चाहिए वह म...
Sanjay  Grover
416
ग़ज़लPHOTO by Sanjay Groverविज्ञों को सम्मान चाहिएचमचों को विद्वान चाहिएजिनके अंदर शक्ति बहुत हैउनमें थोड़ी जान चाहिएबुद्वि थोड़ा कम भी चलेगीबड़े-बड़े बस कान चाहिएपीठ प चढ़के सर पे चढ़ गएसबको ही उत्थान चाहिएआंदोलन भी ख़ूब करेंगेबस कोई मैदान चाहिएअंजुलि में श्रद्धा भर लाओह...
सतीश सक्सेना
101
आग लगाई संस्कारों में सारी शिक्षा भुला गुरु कीदाढ़ी तिलक लगाये देखो  महिमा गाते हैं कुबेर की !डर की खेती करते,जीते नफरत फैला,निर्मम गीत !करें दंडवत महलों जाकर,बड़े महत्वाकांक्षी गीत !खद्दर पहने नेतागण अबलेके चलते , भूखे खप्पर,इन पर श्रद्धा कर...
सतीश सक्सेना
101
हमको घायल किया तार ने,कैसी रंज गिटारों से !कितने दर्द लिखा के लाये, रंजिश पालनहारों से !बेबाकी उन्मुक्त हंसी पर, दुनियां शंका करती है !लोग परखते हृदय निष्कपट,कैसी कैसी चालों से !निरे झूठ को बार बार , दुहराकर गद्दी पायी है !कैसी भी उम्मीद नहीं, इन&nbs...
सतीश सक्सेना
101
हमारे यार, धन दौलत,जमीं,जायदाद रखते हैं !नवाबी शौक़,सज़दे के लिए सज्जाद रखते हैं !मदद लेकर हमारी वे हुए , गद्दी नशीं जब से !  सबक यारों को देने,साथ में जल्लाद रखते हैं !वही कहलायेंगे शेरे जिगर रह कर गुफाओं मेंअकेले जंगलों में भी जिगर फौलाद रख...