ब्लॉगसेतु

jaikrishnarai tushar
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श्री नरेंद्र मोदी जीप्रधानमन्त्रीभारत सरकार मोदी जी भारत के अप्रतिम जननायक हैं ,प्रधानमन्त्री हैं |आज प्रधानमन्त्री जी ने फिर एक असम्भव कार्य संभव कर दिखाया जनता कर्फ्यू लगाकर \ जनता कर्फ्यू वैसे तो कोरोना के विस्तार को रोकने के लिए लगाया गया है किन्तु इसके अन...
अनीता सैनी
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टूटे पंखों से लिख दूँ मैं,बना लेखनी वह कविता।पीर परायी धरुँ हृदय पर,छंद बहे रस की सरिता।मर्मान्तक की पीड़ा लिख दूँ,पूछ पवन संदेश बहे।प्रीत लिखूँ छलकाते शशि को,भानु-तपिश जो देख रहे,जनमानस की हृदय वेदना,अहं झूलती सृजन कहे।पथ ईशान सारथी लिख दूँ,विहान कलरव की सुनीता।टूट...
jaikrishnarai tushar
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चित्र -साभार गूगल दो गीत -जयकृष्ण राय तुषार चित्र -साभार गूगल एक -मन ही मन ख़ामोश कबूतर मन ही मन ख़ामोश कबूतर कुछ बतियाता है |बन्द लिफ़ाफे लेकर अब डाकिया न आता है |क्या इस युग में सब इतने निष्ठुर हो जाएंगे , ,अन्तरंग बातें भी यं...
sanjay krishna
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देश की आजादी में पलामू का भी योगदान रहा है। मुल्क को आजाद कराने में पलामू के युवकों ने हर स्तर पर कुर्बानी दी। इसमें स्वतंत्रता सेनानी केश्वर विश्वकर्मा, हरिनाराण वाजपेयी, महावीर प्रसाद, नीलकंठ सहाय, यदुवर सहाय समेत कई योद्धा शामिल थे। इनमें अब नीलकंठ सहाय को छोड़क...
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उदात्त भावनाओं की अभिव्यक्तियाँ“अरी कलम! तू कुछ तो लिख”       रश्मि अग्रवाल का नाम साहित्यजगत में अनजाना नहीं है। हाल ही में इनका कविता संग्रह “अरी कलम! तू कुछ तो लिख” प्रकाशित हुआ है। आप न केवल एक कवियित्री हैं अपितु एक सफल ग...
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--देते मुझको हौसला, कदम-कदम पर मीत।बन जाते हैं इसलिए, ग़ज़लें, दोहे-गीत।।-- शब्द और व्याकरण का, मुझे नहीं कुछ ज्ञान।इसीलिए करता नहीं, मैं झूठा अभिमान।।-- टंकण कर लेता तभी, जब आते कुछ भाव।शब्दों में करता नहीं, जोड़-तोड़ बदलाव।। --गीत-ग़ज़ल दो...
 पोस्ट लेवल : लिखने का है रोग दोहे
अर्चना चावजी
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मुझे उसका नाम याद नहीं आ रहा पर उसकी याद बहुत आ रही है ........जब शादी होकर गई तो वो दौड़कर घर की चाबी लेकर आया था कोई 14-15 साल का लड़का था ...लालमाटिया कोयला केम्प में चार बजे पत्थर कोयले की सिगड़ी जलने रखता और आधे घंटे बाद लाईन से एक-एक के घर में पहुंचाता ......एक...
 पोस्ट लेवल : लिखी जा रही कहानी
अर्चना चावजी
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सुबह ....जब घड़ी पर नज़र पड़ी 6 बज रहे थे .....5 बजे निकल जाते थे घूमने कांके डेम के किनारे-किनारे ...बेटा छोटा था तो जाने का मन होते हुए भी न जा सकती थी या फिर ऐसे कहूँ कि बेटा सुबह उठ जाता तो आपकी नींद खुल जाती दुबारा सोना मुश्किल होता तो आप घूमने निकल जाते ....कांक...
 पोस्ट लेवल : लिखी जा रही कहानी
PRABHAT KUMAR
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मेरा लिखना, लिखना क्या अगर वह विवादित नहींसूरज को सूरज और चांद को चांद तो सब कहते हैंअगर मैं सूरज को चांद न कहूँ तो इनको परिभाषित कौन करेअगर मैं तुम्हारी तरह हाँ में हाँ मिलाकर उनसे कुछ न बोलूंजिनके भक्त बन जाते हैं और अनुयायी पैमाने पर चलते हैंतो मैं भी भक्त ही कह...
jaikrishnarai tushar
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संगम प्रयागराज प्रयागराज में रसूलाबाद जहाँ श्मशान के लिए जाना जाता है, वहीं साहित्यकार संसद भी महादेवी वर्मा जी ने स्थापित किया था, जिसकी वह ट्रस्टी भी रहीं |निराला की कविता बाधों न नाव इस ठाँव बन्धु यहीं रची गयी |उमाकान्त मालवीय, इलाचंद जोशी,मैथिलीशरण गुप्त ,...