ब्लॉगसेतु

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--देते मुझको हौसला, कदम-कदम पर मीत।बन जाते हैं इसलिए, ग़ज़लें, दोहे-गीत।।-- शब्द और व्याकरण का, मुझे नहीं कुछ ज्ञान।इसीलिए करता नहीं, मैं झूठा अभिमान।।-- टंकण कर लेता तभी, जब आते कुछ भाव।शब्दों में करता नहीं, जोड़-तोड़ बदलाव।। --गीत-ग़ज़ल दो...
 पोस्ट लेवल : लिखने का है रोग दोहे
अर्चना चावजी
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मुझे उसका नाम याद नहीं आ रहा पर उसकी याद बहुत आ रही है ........जब शादी होकर गई तो वो दौड़कर घर की चाबी लेकर आया था कोई 14-15 साल का लड़का था ...लालमाटिया कोयला केम्प में चार बजे पत्थर कोयले की सिगड़ी जलने रखता और आधे घंटे बाद लाईन से एक-एक के घर में पहुंचाता ......एक...
 पोस्ट लेवल : लिखी जा रही कहानी
अर्चना चावजी
73
सुबह ....जब घड़ी पर नज़र पड़ी 6 बज रहे थे .....5 बजे निकल जाते थे घूमने कांके डेम के किनारे-किनारे ...बेटा छोटा था तो जाने का मन होते हुए भी न जा सकती थी या फिर ऐसे कहूँ कि बेटा सुबह उठ जाता तो आपकी नींद खुल जाती दुबारा सोना मुश्किल होता तो आप घूमने निकल जाते ....कांक...
 पोस्ट लेवल : लिखी जा रही कहानी
PRABHAT KUMAR
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मेरा लिखना, लिखना क्या अगर वह विवादित नहींसूरज को सूरज और चांद को चांद तो सब कहते हैंअगर मैं सूरज को चांद न कहूँ तो इनको परिभाषित कौन करेअगर मैं तुम्हारी तरह हाँ में हाँ मिलाकर उनसे कुछ न बोलूंजिनके भक्त बन जाते हैं और अनुयायी पैमाने पर चलते हैंतो मैं भी भक्त ही कह...
jaikrishnarai tushar
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संगम प्रयागराज प्रयागराज में रसूलाबाद जहाँ श्मशान के लिए जाना जाता है, वहीं साहित्यकार संसद भी महादेवी वर्मा जी ने स्थापित किया था, जिसकी वह ट्रस्टी भी रहीं |निराला की कविता बाधों न नाव इस ठाँव बन्धु यहीं रची गयी |उमाकान्त मालवीय, इलाचंद जोशी,मैथिलीशरण गुप्त ,...
PRABHAT KUMAR
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न हों शब्द तो क्या लिखोगे किसी के लिएजीने-मरने और उनकी शहादत के लिएतस्वीरः गूगल साभारमां का आँचल सूना कहूँ या उनकी हिम्मत का दूं दादहर अखबार लिख रहा है दर्द पर कहाँ बुझ रहा है चिरागसड़कों पर निकला है आज बड़ा हुजूम जवानों का परहौसला उन नन्हों में है जो अपने पिता को सल...
Akhilesh Karn
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गायक : सुनील मल्लिक व साथीफिल्म: पारंपरिक होली गीत परदेशिया के चिटि्टया लिखावे गोरिया परदेशियापरदेशिया हो  परदेशिया हो  परदेशिया हो परदेशिया के चिटि्टया लिखावे गोरिया परदेशियापरदेशिया के चिटि्टया लिखावे गोरिया परदेशिया जब परदेशिया नगर बीचे आएजब परद...
Nitu  Thakur
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हे मितवा मनमीत मेरेहर गीत तुम्हारे नाम लिखूंगीशब्दों में जो बंध ना पायेऐसे कुछ अरमान लिखूंगीप्रीत के पथ के हम दो राही तेरा नेह बनाकर स्याही अपने अनुरागी जीवन में तुझको अपनी जान लिखूंगी खुद को खोकर तुझको पायाईश मेरे मै तेरी छायाअपना सबकुछ अर...
PRABHAT KUMAR
155
नहीं लिखी जातीं अब मुझसे कविताएँहाथ कांपते हैं, लिखते हैं जब हम कुछआंखों में आंसू तो क्या चोट पर रक्त भी नहींनिकलते, मिट गई हैं सारी संवेदनाएंनहीं लिखी जातीं...... इधर-उधर की ठोकरों से स्थिर हो गया हूँमन के उलझनों में खो सा गया हूँविश्वास और अविश्वास की खाई पटने व...
Nitu  Thakur
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वो आखरी खत जो तुमने लिखा था तेरे हर खत से कितना जुदा था मजबूरियों का वास्ता देकर मुकर जाना तेरा गुनहगार वो वक़्त था या खुदा था बड़ी मुश्किल से संभाला था खुद को वो पल भी मुश्किल बड़ा था शिकायत करते तो किस से करते जब अपना मुकद्दर ही जु...