ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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बरसी न बदरिया न मुलाक़ात बहारों से की,  न तितलियों ने ताज पहनाया न  फुहार ख़ुशियों ने की,   मिली न सौग़ात सितारों की, ढलती शाम में वह कोयल-सी गुनगुनायी,    मुद्दतों बाद आज मेरी दहलीज़ मुस्कुरायी, &nb...
अनीता सैनी
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 कुछ हर्षाते लम्हे अनायास ही मौन में मैंने धँसाये  थे  आँखों  के पानी से भिगो कठोर किया उन्हें  साँसों की पतली परत में छिपा ख़ामोश किया था जिन्हें फिर भी  हार न मानी उन्हो...
Tejas Poonia
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फ़िल्म - 1921रिलीज़ डेट - 12 जनवरी 2018बैनर - ASA प्रोडक्शन एंड एंटरप्राइजनिर्देशक - विक्रम भट्टनिर्माता - विक्रम भट्टलेखक - विक्रम भट्टसंगीतकार - हरीश सगाने, असद खान, प्रणीत मावलेगीतकार- शकील आज़मी, रक़ीब आलम, हरीश सगा...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) Roshan Suchan13-01-2018     संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
Nitu  Thakur
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वक़्त की दहलीज़ पररोशनी  सी टिमटिमाई रात के अंधियारे वन में एक खिड़की दी दिखाई चल ख्वाबों के पंख लगाकर नील गगन में उड़ते जायें तारों से रोशन दुनिया में सपनों का एक महल बनायें जहाँ बहे खुशियों का सागर फूलों की खुशबू को स...
 पोस्ट लेवल : वक़्त की दहलीज़ पर
ANITA LAGURI (ANU)
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आज फिर तुम साथ चले आएघर की दहलीज़  तक..!पर वही सवाल फिर से..!क्यों मुझे दरवाज़े तक छोड़विलीन हो जाते हो इन अंधेरों में..?क्यों नहीं लांघते  इन  दहलीज़ों को..?जानती हूँ  तुम्हें पता है नामेरा वो अंधेरों से  डर...!अ...
seema sachdeva
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जानवर -कुदरत का अनमोल रत्न और ऐसी सृजना जो किसी मानव के बस की बात ही नहीं न जाने स्वार्थवश हम इन बेजुबान निर्दोष जानवरों को ही क्यों पशु की श्रेणी में रखते हैं जबकि ये तो किसी न किसी तरह मानव के काम ही आते हैं और तब तक हिंसक नहीं होते जब तक उन्हें हिंसक बनाया न जाए...