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sanjay krishna
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मालूटी मंदिरों का गांव है। राज्य की दूसरी राजधानी दुमका से पूरब 55 किमी दूर शिकारीपाड़ा प्रखंड में यह ऐतिहासिक गांव स्थित है। रामपुर रेलवे स्टेशन से पश्चिम में 16 किमी दूर है। यहां पहुंचने के लिए राजधानी रांची से बस द्वारा देवघर होते हुए भी पहंुचा जा सकता है। वहीं द...
 पोस्ट लेवल : मलूटी के मंदिर
PRABHAT KUMAR
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मुझे मालूम है मोहब्बत में किसी की खुशामद करनाऔर, गर मकसद न हो कुछ तो इबादत करनामगर किसी की आंखों का तारा बनना नहीं मुझेमुझे आता है आसमान का सितारा बनकर रहना#प्रभातPrabhat Prabhakar
डा. सुशील कुमार जोशी
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ना तो तू शेर है ना ही हाथी है फिर किस लिये इच्छा करता हैदहाड़ने की और चिंघाड़ने की तेरी मर्जी कैसे चल सकती हैहिम्मत है तुझे फर्जी होने की जंगल में होना और शिकार करना नंगे होना साथ में तीर तलवार होनाकोई पाषाण युग थोड़े ना चल रहा है दर्जी है खुद...
विजय राजबली माथुर
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डा. सुशील कुमार जोशी
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कल का लिखा क्या बिक गया सारा आज फिर से उसी पर किसलिये वही कुछ लिख लारा दुबारा देख वो लिख लारा घड़ियाँ सारी समय सबको जो आज सबका दिखारा समझ पीठ में लगी चाबियाँ अपनी टिक टिक की दूर कहीं कहाँ जा कर छुपारा क्यों नहीं पूछ कर ही लिख लेता किसी से कुछ उसी&nbsp...
समीर लाल
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Ingredients:आलू – Potato – 2धनिया पत्ती – Coriander Leaves – 100 gmsटमाटर – Tomato - 1लहसुन – Garlic - 6-8 Clovesअदरक – Ginger – 1 /2 Inchहरी मिर्च – Green Chilli - 2जीरा – Cumin Seeds – 1 Tea Spoonतेल  - Cooking Oil – २ Tea Spoonहींग – Asafetida – 1 pinch हल्...
समीर लाल
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Ingredients:आलू - Potato- Boiled – 2 Big Sizeदही - Yogurt  – 4 Tea Spoonधनिया पावडर – Coriander Powder – 1 Tea Spoonजीरा पावडर - Cumin Powder – 1 Tea Spoonअमचूर - Amcoor Powder – 1 Tea Spoon (Try ½  tea spoon unless you like extra sour)कस्मीरी लाल मिर्च प...
sanjeev kumar mishra mishra
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लाडो सराय, कालू सराय, शेख सराय, बेर सराय, सराय रोहिल्ला, नेब सराय, कटवरिया सराय..दिल्ली में एक दो नहीं बल्कि कई सराय मिलेंगे। ये सराय जो कभी ठिकाना होते थे यात्रियों के सुरक्षित प्रवास के। जहां यात्री, कारोबारी, तीर्थयात्री विश्राम करते थे, वो भी निश्चिंत होकर। इन...
डा. सुशील कुमार जोशी
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पहाड़ी झबरीले कुछ काले कुछ सफेद कुछ काले सफेद कुछ मोटे कुछ भारी कुछ लम्बे कुछ छोटे कुत्तों के द्वारा घेर कर ले जायी जा रही कतारबद्ध अनुशाशित पालतू भेड़ों का रेवड़ गरड़िये की हाँक के साथ पथरीले ऊबड़ खाबड़ ऊँचे नीचे उतरते चढ़ते छिटकते फिर वापस लौटते मिमियाते मेंमनों को...
डा. सुशील कुमार जोशी
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भटकता क्यों है लिख तो रहा है पगडंडियाँ ही सही इसमें बुरा क्या है  रास्ते चौड़े बन भी रहे हैं भीड़ के लिये माना अकेले चलने का भी तो कुछ अपना अलग मजा है जरूरी नहीं है भाषा के हिसाब से कठिन शब्दों में रास्ते लिखना रास्ते में ही जरूरी है चलना किस ने कहा है सरल शब्...
 पोस्ट लेवल : कमल लूट बेवकूफ उलूक