ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
6
लेख:भारत की लोक सम्पदा: फागुन की फागेंआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'.भारत विविधवर्णी लोक संस्कृति से संपन्न- समृद्ध परम्पराओं का देश है। इन परम्पराओं में से एक लोकगीतों की है। ऋतु परिवर्तन पर उत्सवधर्मी भारतीय जन गायन-वादन और नर्तन की त्रिवेणी प्रवाहित कर आनंदित होते है...
 पोस्ट लेवल : फागें लेख लोकगीत
अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
583
ग्राम गीत का समस्त महत्व उसके काव्य-सौंदर्य तक ही सीमित नहीं है. इनका एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है एक विशाल सभ्यता का उद्घाटन जो अब तक या तो विस्मृति के गर्भ में डूबी हुई है या गलत समझ ली गई है.आर्य आगमन के पूर्व ही समृद्ध आर्येतर सभ्यता भारतवर्ष में फैली हुई थी....
Akhilesh Karn
257
गायिका: पूनम मिश्राएल्बम: मैथिली लोकगीत कइली हम कोन कसूर  नयनमा से दूर कइल बलमु हो सोने की थार में भोजन परोसलभोजन परोसल हो भोजन परोसलसोने की थार में भोजन परोसलकरजुनी जइहा हजूर हो नयनमा से दूर कइल बलमु हो चुनी चुनी फूलवा से सेज सजवनीदूर कइल...
Akhilesh Karn
257
गायिका: चंदन तिवारीएल्बम: भोजपुरी लोकगीतनहिरे के पोसल देहिया अरे ससुरा भइली माटी एहिजा मिलत नइखेएहिजा मिलत नइखेहमरा के दही दूध खांटीएहीजा मिलत नइखेहमरा के दही दूध खांटीएहीजा मिलत नइखेनहिरे के पोसल देहिया नहिरे के पोसल देहिया ससुरा भइली माटी&nbsp...
Akhilesh Karn
257
गायिका: पूनम मिश्राएल्बम: मैथिली लोकगीत जहिये से गलखिन सजना नीन उड़ि गेलिआहे राम नीन उड़ि गेलिफिर ने घुरि क एलै नाफिर ने घुरि क एलै नाराम जकरे ल जगलियैओ निरमोहिया भैलै नाराम जकरे ल जगलियैओ निरमोहिया भैलै नाराम जकरे ल जगलियैजहिये से गलखिन सजना नीन उड़ि गेलिआहे राम नीन...
sanjiv verma salil
6
* लोकगीत:  पोछो हमारी कार.....संजीव 'सलिल'*ड्राइव पे तोहे लै जाऊँ, ओ सैयां! पोछो हमारी कार.  पोछो हमारी कार, ओ बलमा! पोछो हमारी कार.....*नाज़ुक-नाज़ुक मोरी कलाई,गोरी काया मक्खन-मलाई. तुम कागा से सुघड़, कहे जग-'बिजुरी-मेघ'...
 पोस्ट लेवल : लोकगीत lokgeet
sanjiv verma salil
6
हरियाणवी लोकगीतों में छंद-छटा - चंद्रकांता अग्निहोत्री*परिचय: जन्म: पंजाब। आत्मजा: श्रीमती लाजवन्ती जी-श्री सीताराम जी। जीवनसाथी: श्री केवलकृष्ण अग्निहोत्री। काव्य गुरु: डॉ. महाराजकृष्ण जैन, आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' जी, ॐ नीरव जी। लेखन विधा: लेखन, छायांकन. पेंटिंग...
sanjiv verma salil
6
५. बघेली गीतों / लोकगीतों में छंद छाया सक्सेना ' प्रभु' - संजीव वर्मा 'सलिल'परिचय: जन्म १५.८.१९७१, रीवा (म.प्र.)। शिक्षा: बी.एससी. बी.एड., एम.ए. राजनीति विज्ञान, एम.फिल.), संपर्क: १२ माँ नर्मदे नगर, फेज़ १, बिलहरी, जबलपुर , चलभाष ९४०६०३४७०३ ईमेल:chhayasaxena250...
sanjiv verma salil
6
हिमाचली लोकगीतों में छंदबद्धता- आशा शैली *जन्मः २ अगस्त १९४२,‘अस्मान खट्टड़’ (रावलपिण्डी, अविभाजित भारत), मातृभाषा पंजाबी, शिक्षा: विद्याविनोदिनी, लेखन विधाःकविता, कहानी, गीत, ग़ज़ल, शोधलेख, लघुकथा, समीक्षा, व्यंग्य, उपन्यास, नाटक एवं अनुवाद,...
sanjiv verma salil
6
कुमाऊनी लोकगीत में छंद : एक विमर्शडाॅ0 वसुंधरा उपाध्यायसहा. प्राध्यापक हिंदी विभाग  एल.एस.एम.रा.स्ना.महा. पिथौरागढ़ भारत के अन्य भागों के इतरह कुमाऊँ में लोक साहित्य की परंपरा उतनी ही पुरानी है जितनी पुरानी मानव जाति है। लोकगीत, लोक कथा, लोकोक्ति...