ब्लॉगसेतु

संतोष त्रिवेदी
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यह अच्छा ही हुआ कि हमारे यहाँ ‘लोकतंत्र के मंदिर’ के निर्माण की इजाज़त मिल गई।देश में लोकतंत्र का निबाह हो और उसका मंदिर न हो,यह निहायत बचकानी बात है।ऐसा नहीं है कि हमारे यहाँ पहले ‘लोकतंत्र का मंदिर’ था ही नहीं, पर लोकतंत्र की तरह वह भी बहुत पुराना हो गया है।कई बा...
अमितेश कुमार
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राजनीतिक लोकतंत्र हमारे समय और संस्कृति का भव्य प्रदर्शनात्मक स्थल है, जिसमें निहित नाटकीयता और लीलाभाव के कारण आस्वाद का दायरा व्यापक होता है. इसकी उपस्थिति हमारे होने को सबसे अधिक प्रभावित करती है जिसके अंतर्गत होने वाली क्रियाओं में उसी तरह का तनाव, द्वंद्व और आ...
अनंत विजय
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अभी हाल ही में दिल्ली में शाहीन बाग में लंबे समय तक चले धरना प्रदर्शन को लेकर आम नागरिकों को होनेवाली दिक्कतों पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। हमारे देश में अदालतों की कार्यवाही अपनी गति से चलती हैं। शाहीन बाग में धरना खत्म होने के कई महीनों बाद इसपर फैसला आया...
संतोष त्रिवेदी
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आदरणीय पूर्णकालिक,कार्यकारी,अंतरिम या ‘नॉन-वर्किंग’ अध्यक्ष जी ! इसमें जो भी संबोधन आपको लोकतांत्रिक लगे, ‘फिट’ कर लीजिएगा।सबसे पहले हम यह ‘किलियर’ किए दे रहे हैं कि यह वाली चिट्ठी पहले वाली जैसी बिलकुल नहीं है।इसे ‘जस्ट’ पिछली वाली को ‘कंडेम’ करने के लिए लिख रहे ह...
विजय राजबली माथुर
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  मंजुल भारद्वाज की कविताओं ने मोड़ा राजनैतिक बहस का रुख !आपदा मनुष्य को एक नयी पहचान देती है। आज की विकट स्थिति ने समाज, मानव प्रकृति और व्यवस्था के असली चेहरे को उजागर किया है, ऐसी स्थिति आमतौर पर हमारे सामने नहीं आती और यह दुनिया के इतिहास में पहली बार...
विजय राजबली माथुर
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Jaya Singh5 hrsसंघ(RSS) की इस टेक्निक को समझे बिना आप आरएसएस की राजनीति को नहीं समझ सकते-----संघ का हमेशा से एक गूढ़ उद्देश्य रहा है कि संघ को कथित ऊंची जातियों की, उसमें भी ऊंची जातियों के सक्षम पूंजीपतियों की सत्ता स्थापित करनी थी, जिसके लिए "हिन्दू धर्म" का चोगा...
sanjiv verma salil
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नवगीत:संजीव.लोकतंत्र कापंछी बेबस.नेता पहले डालें दानाफिर लेते पर नोचअफसर रिश्वत गोली मारेंकरें न किंचित सोचव्यापारी देनशा रहा डँस.आम आदमी खुद में उलझादे-लेता उत्कोचन्यायपालिका अंधी-लूलीपैरों में है मोचठेकेदार-दलालों को जस.राजनीति नफरत की मारीलिए नींव में पोचजनमत बह...
 पोस्ट लेवल : नवगीत लोकतंत्र
सुशील बाकलीवाल
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      इस समय देश में जिस अफरातफरी का माहौल बना हुआ है इसमें हर उस राज्य में जहाँ BJP का शासन है वहाँ जमकर हिंसा, आगजनी, तोडफोड और जो भी सामने आए उसे नष्ट करदो का जो माहौल बनाया हुआ है क्या यह सिर्फ नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ निकाला जा...
संतोष त्रिवेदी
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इन दिनों ‘लोकतंत्र’ और ‘सत्य’ लगातार खबरों में बने हुए हैं।इससे इस बात की पुष्टि भी होती है कि ये दोनों अभी तक जीवित हैं।यह इस सबके बावजूद हुआ जबकि हर दूसरे दिन ‘लोकतंत्र की हत्या’ होने की मुनादी पिटती है।पर यह सशक्त लोकतंत्र का कमाल ही है कि वह अगले दिन सही-सलामत...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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हसरत-ए-दीदार में सूख गया बेकल आँखों का पानी,कहने लगे हैं लोग यह तो है गुज़रे ज़माने की कहानी।मिला करते थे हम मेलों त्योहारोंउत्सवों में,मिलने की फ़ुर्सत किसे अब नस-नस में दौड़ती है  नशा-ए-इंटरनेट की रवानी। लिखते थे...