ब्लॉगसेतु

Asha News
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झाबुआ। अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद के शहादत दिवस पर संस्था लोकरंग और राष्ट्र जागरण मंच ने एक शाम आज़ाद के नाम कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय आज़ाद चौक पर किया था। लोकरंग के कलाकारों  आज़ाद के जीवन के ऊपर नृत्य नाटिक की बेहतरीन प्रस्तुति दी।  आज़ाद के फौलादी इराद...
Asha News
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बाल कलाकारों ने लोकरंग शिविर के समापन को बनाया यादगार, पैलेस गार्डन में ढाई घंटे चला कार्यक्रम झाबुआ। लोकरंग शिविर के समापन समारोह में बच्चो ने कला रंग की ऐसी छठा बिखेरी की हर कोई इन उभरते हुए कलाकारों की तारीफ करने से खुद को नहीं रोक पाया। पैलेस गार्डन में...
Shreesh Pathak
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सदा आनन्द रहै एहि द्वारे(तीसरी किश्त: आखिरी भाग) हर घर के दुआर पर जा-जा कर "सदा आनन्द" गाया जाता। भीतर से औरतें ख़ूब रंग फेंकतीं। हर घर से अपनी क्षमता के मुताबिक मिठाई, गुझिया जो बन पड़े, खिलाया जाता। पर होरियारों को कुछ खास घरों का इंतज़ार रहता। उन घरों का जहाँ...
Shreesh Pathak
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आलोक झा लोकप्रिय युवा कथाकार हैं l विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से इनकी जीवंत उपस्थिति दिखती है l बेहद सक्रिय बिंदास अल्हड़ व्यक्तित्व, ज़िंदगी का रेशा रेशा महसूसने में यकीन l सम्प्रति केरल में शिक्षा के अनगिन प्रयोग कर रहे हैं l पढ़िए इनकी ताज़ातरीन कहान...
 पोस्ट लेवल : लोकरंग कहानी आलोक झा
मुन्ना के पाण्डेय
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                भिखारी ठाकुर का रंगकर्म भोजपुरी लोकजीवन की विविध पक्षों का साहित्य है और उनका नाट्य भोजपुरी लोकजीवन की सांस्कृतिक पहचान. उनके रचनाओं और रंगकर्म में एक पूरी सामाजिक परंपरा और इतिहास के दर्शन होते हैं. किन्...
संजीव तिवारी
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लोकरंग अरजुन्‍दा की प्रस्‍तुति 'शहंशाह सन्यासी स्वामी विवेकानंद' विगत दिनों भिलाई के नेहरू सांस्‍कृतिक सदन में देखने का अवसर मिला। यह नाटक स्‍वामी विवेकानंद के जीवन के उन उल्‍लेखनीय पहलुओं पर आधारित था, जिसके सहारे वे विश्व भर में जाने पहचाने गए। नाटक में विवेकानंद...
मुन्ना के पाण्डेय
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गतांक से आगे (अंतिम भाग)...भोजपुरी के किसी कवि गीतकार की तुलना में महेंद्र मिश्र का शास्त्रीय संगीत का ज्ञान अधिक व्यापक एवं गंभीर रहा है | उन्होंने कविता और संगीत के रिश्ते पर विचार किया जैसे सूरदास, निराला एवं प्रसाद ने किया | उनकी कविता सिद्ध करती है कि कविता मे...
मुन्ना के पाण्डेय
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गतांक से आगे ......रामचरित मानस और रामायण उन्हें बहुत कंठाग्र था । जिस तरह तुलसी ने पांडित्य संस्कृत का त्याग कर अवधी भाषा का प्रयोग किया और रामकथा को जन-जन तक पहुँचाया,उसी प्रकार महेंद्र मिश्र ने भोजपुरी भाषा में कथावाचक शैली में जीवन भर रामकथा का प...
मुन्ना के पाण्डेय
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गतांक से आगे...सन १९२०ई. के जुलाई अगस्त माह में पटना के सीआईडी सब-इन्स्पेक्टर जटाधारी प्रसाद को नोट छापने वाले व्यक्ति का पता लगाने की जिम्मेवारी सौंपी गई । उनके साथ सुरेन्द्रनाथ घोष भी लगे । जटाधारी प्रसाद ने भेष और नाम बदल लिया । वे हो गए गोपीचंद और महेंद्र...
मुन्ना के पाण्डेय
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 गतांक से आगे...इस बात में कोई संदेह नहीं कि कभी महेंद्र मिश्र हलिवंत सहाय के रंगीन मुजरा महफ़िल में भी गाते थे और कभी-कभी नर्तकियों-गायिकाओं के निवास पर भी जाकर गायन वादन  में संगत करते थे । पर इस शौक का मूल कारण उनका संगीत प्रेम ही था । उनके इस संगीत प्र...