ब्लॉगसेतु

Lokendra Singh
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डॉ. सौरभ मालवीय और लोकेंद्र सिंह की पुस्तक ‘राष्ट्रवाद और मीडिया’ का विमोचनसांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अध्येता डॉ. सौरभ मालवीय एवं लोकेन्द्र सिंह की पुस्तक ‘राष्ट्रवाद और मीडिया’ का विमोचन मीडिया विमर्श की ओर से आयोजित पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक सम्मान...
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मैं ठहरा अल्हड़ प्रेमीप्रेम की व्याकरण में शून्यराजा गुलाब भेंट करने काक्या जानूं मैं शिष्टाचार।उस रोज पता चलारंग अलग भाव अलगजब पहली ही मुलाकात मेंथमाया तुम्हें लाल गुलाब।प्रभु, पूरे पागल तो तुमकुछ तो तुम सोचो-समझोभला कौन देता-लेता हैपहले-पहल लाल गुलाब।प्रेम करने लग...
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Lokendra Singh लोकेन्द्र सिंह | Raisen Fort, Madhya Pradesh राम तेरी दुनिया में आकररंग देख रहा हूं, जीने का ढंग देख रहा हूं।पल-पल में बदल रहे हैं लोगरंगे सियारों का रंग देख रहा हूं।।महंगाई सुरसा-सा मुंह फाड़ रही हैआम आदमी दाने-दाने को मोहताज देख रहा हूं।म...
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Lokendra Singh : Gopal Bag, GovindGarh, Rewaमंजिल की तलाश मेंजब निकला थातब कुछ न था पास मेंन थी जमीं और न आसमां थाबस सपने बहुत थे आंख मेंअब तो...मिल गया है रास्तापैर जमाना सीख रहा हूंशिखर को जो छूना है।चलता रहा मीलोंएक आस में भूखा-प्यासादर-दर घूमा खानाबदोश-सान तो द...
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हार और जीत ही काफी नहीं जिंदगी में मेरे लिएमीलों दूर जाना है अभी मुझे। निराशा के साथ बंधी आशा की इक डोर थामेउन्नत शिखर की चोटी पर चढ़ जाना है मुझे। हार और जीत ही....है अंधेरा घना लेकिनइक दिया तो जलता है रोशनी के लिएउसी रोशनी का सहारा लिए भे...
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ऋष्वी के पांचवे जन्मदिन परनखरे तुम्हारे ---सुनो, मीठीनखरे बढ़ गए हैं तुम्हारेज़िद्दी पहले हीबहुत थी तुम।अब गुस्सा होकरकोप भवन में बैठनाबड़ा प्यारा लगता है।बता नहीं सकतामनाना तुम्हेंकितना भाता है मुझे।यह बात तोजानती हो तुम भीइसलिए नौटंकी तुम्हारीमेरे घर आने पर हीह...
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इक स्वप्न थातुम्हारी आँखों में उस रातसोते समय कहानी नहीं सुनी तुमनेकंधे पर टिका कर सिरसोने की ज़िद भी नहीं की तुमनेप्यार से बालों मेंअंगुलियां फिराने की चाह भी कहाँ की तुमने। उस रात, उस समयनींद की गोद में जाने से पहलेइक भरोसा, इक वायदाचाहती थी तुम। रख कर मेरी बड़ी हथ...
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डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों को अपने जीवन में आत्मसात किए हुए प्रख्यात गांधीवादी एवं समाजवादी चिंतक श्री रघु ठाकुर जी का सान्निध्य (संत संगति) लंबे अरसे बाद प्राप्त हुआ। इस अवसर पर उनसे "समाजवाद और डॉ. लोहिया के विचारों" पर महत्वपूर्ण साहित्य प्राप्त किया। अपनी...
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कालिदास के मेघदूत भी यहाँ आकर ठहरेअमरकंटक को मध्यप्रदेश के वनप्रदेश की उपमा प्राप्त है। आम, महुआ और साल सहित नाना प्रकार के वृक्ष मैकाल पर्वत का श्रृंगार करते हैं। अमरकंटक के जंगलों में आम के वृक्ष अधिक होने के कारण प्राचीन ग्रंथों में आम्रकूट के नाम से भी इस स्थान...
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फोटो विश्व प्रसिद्द बौद्ध स्थल 'साँची' परिसर का हैबारिश की बेरुखीऔर चिलचिलाती धूप में वो बूढ़ा दरख्त सूख गया हैसाखों पर बने घोंसले उजड़ गएउजड़े घोंसलों के बाशिन्दे/ परिन्देनए ठिकाने/ आबाद दरख्त की तलाश में उड़ चलेबूढ़ा दरख्त तन्हा रह गयाआंसू बहाता, चिलचिलाती धूप मे...