ब्लॉगसेतु

अरुण कुमार निगम
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कुछ सामयिक दोहे .....मैला है यदि आचरण, नीयत में है खोट रावण मिट सकते नहीं, चाहे बदलो नोट । नैतिक शिक्षा लुप्त है, सब धन पर आसक्त सही फैसला या गलत, बतलायेगा वक्त । बचपन बस्ते में दबा, यौवन काँधे भार प्रौढ़ दबा दायित्व में, वृद्ध हुए लाचार ।&n...
जन्मेजय तिवारी
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                      सिंहासन की ओर देखते-देखते आँखें पथरा गई हैं । युवराज सियार को तो बस खाट का ही सहारा है । खाट की हिमाकत इतनी कि वह उन्हें काट रही है । एक चादर भला कितनी सुरक्षा प्रदान कर सकती है । जिस...
राजीव कुमार झा
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); दूर क्यों हो पास आओ जरा देखो गगन से मिल रही धरा कलियां खिल रही कितने जतन से चाँद की रौशनी से नहाओ जरा धडकनें खामोश हैं वक्त है ठहर गया जो नजरें मिली कदम रुक सा गया हठ बचपनों सा अब तो छोड़िए मन का संबंध मन से जोड़िए...
 पोस्ट लेवल : ख़ामोशी गगन वक्त
राजीव कुमार झा
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); होठों की हंसी देखे अंदर नहीं देखा करते किसी के गम का समंदर नहीं देखा करते कितनी हसीन है दुनियां लोग कहा करते हैं मर-मरके जीने वालों का मंजर नहीं देखा करते पास होकर भी दूर हैं उन्हें छू नहीं सकते बिगड़े मुकद्दर की न...
 पोस्ट लेवल : गम समंदर हंसी वक्त
शिवम् मिश्रा
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दिल्ली आए हुए एक महीना से बेसी हो गया है. अऊर महानगर के जिन्नगी जइसा हम भी जुट गए हैं, चाहे कहीए जुत गए हैं. नया जगह भी नहीं है, नया ऑफिस भी नहीं है, नया काम भी नहीं है... लेकिन जब एतना साल बीत जाता है, त अपना घरवो अनजान बुझाता है. काहे कि सुबह का भुलायल अदमी को सा...
सुशील बाकलीवाल
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            1.   जो आपसे दिल से बात करता है, उसे कभी दिमाग से जवाब मत देना ।            2.  एक साल मे 50 मित्र बनाना आम बात है पर 50 साल तक...
PRABHAT KUMAR
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क्योंकि कहानी लिख दूंगा क्योंकि नया ज्ञान दे सकूँगा कहीं रहस्य ही सुलझा दूंगाअकेला ही सब कर लूँगा इसलिए ही छीन लिया मेरा भाग्य और फिर मेरा ज्ञान, मेरा अहंकार मेरी शक्तियां, मेरे हौंसलों का तार क्यों संसार में मुझे आना था पाने के सिवाय लुटवाना थाजिन्दगी भीष्म सा होन...
महेश कुमार वर्मा
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वक्त पर होती है पहचान कि दोस्त कैसा है वक्त पर पर होती है पहचान कि कौन कैसा है वक्त पर होती है पहचान दोस्त की वक्त पर होती है पहचान अपनों की यदि बुरा वक्त न आए तो न होगी इनकी सही पहचान बुरा वक्त में ही होती है इनकी सही प...
भावना  तिवारी
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'बदलता वक्त' परिवर्तित होता जा रहा आज मौसम जाड़ा, गर्मी और बरसात हाय रे ! तीनों भयानक, तीनों निर्मम सह नहीं पाता मेरा बदन एक के गुजरने पर दूसरा बिन बताये शुरू कर देता अपनी चुभन कैसा है ये परिवर्तन क्यों होता है ये परिवर्तन समय बदलता रहता है काल का पहिया चल...
सुमन कपूर
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दिन गरम है अब और रातें ठण्डी सुना है सूरज को लग गया है मुहब्बत का रोग सुलगने लगा है दिन भर शाम की माँग में टपकने लगा है उमस का सिन्धूर आसमां रहने लगा है ख़ामोश रात कहरा कर ढक लेती है ओस का आँचल चाँद ता...
 पोस्ट लेवल : वक्त वक्त की तासीर