ब्लॉगसेतु

सुमन कपूर
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इक पड़ाव पर ठहर कर अपनी सोच को कर जुदा सिमट एक दायरे में करती स्व का विसर्जन चलती है एक अलग डगर उम्र पार की वो औरत |देह के पिंजर में कैद उम्र को पल-पल संभालती वक्त के दर्पण की दरार से निहारती अपने दो अक्स ढूंढती है उसमे अपना वजूद उम्र पार की वो औरत |नियति के चक्रवा...
सुमन कपूर
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ना फिज़ा बदली ना शहर बदला इस जगह से मेरा ठिकाना बदला दो घड़ी रुक ऐ वक्त तू मेरे लिए मेरे हिस्से का तेरा पैमाना बदला शब ना हो उदास इस कदर तन्हा वही है जाम बस मयखाना बदला लिखने का सबब नहीं कोई 'मन' मेरे लफ्ज़ो अब आशियाना बदला !!सु.....
 पोस्ट लेवल : वक्त लफ्ज़ बदलाव
Anju choudhary(anu)
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 क्षितिजा ...मेरी बाल्यावस्था कस्तूरी ... लेखन का यौवन रूप रंग लिए  अरुणिमा ...एक परिपक्व सोच ...बहुत दुःख होता है जब एक पढ़ा लिखा इंसान ...किसी भी भाषा पर  कोई टिप्पणी करता है और उसके लेखन पर उँगलियाँ उठायी जाती हैं .बहुत दिनों से इस बारे में ल...
Sanjay Chourasia
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मुझे " संत कबीर दासजी " का एक दोहा याद आता है ! " काल करे सो आज कर , आज करे सो अब , पल में परलय होएगी ,बहुरि करेगा कब "  किन्तु हम हमेशा यही सोचते हैं !  काश , अगर हम थोड़ा और रुक जाते तो यह मोबाईल हमें  और सस्ता मिल जाता , काश ,  थोड़ा और रुक ग...
Manav Mehta
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वक्त को हथेली पर रख करऊँगलियों पर लम्हें गिने हैं...दर्द देता है हौले से दस्तक-इन लम्हों के कई पोरों में बसा हुआ है वो....!!ज़ब्त करती हैं जब पलकें,किसी टूटे हुए ख्वाब को-आँखों में दबोचती हैंतब पिघलता नहीं है मोम-बस टुकड़े चुभते हैं उस काँच के....!!इन आँखों से अ...
 पोस्ट लेवल : वक्त दर्द